Ridván Messages
Hindi · Universal House of Justice
िेखो ’महानिम नाम’ का समुिाय दकस िरह खड़ा होिा है! नई ’योजना’ के आरंभ हुए एक िर्ष बीिने के साथ ही ररपोटों से प्रमाविि होने लगा ह ैदक दकिने बड़ ेपैमाने पर क्या प्रयास दकए जा रह ेहैं और क्या उपलवधियां आरंभ हो चुकी ह।ैं 5,000 विकास कायषक्रमों में और अविक गहनिा लाने का काय ष अभूिपूिष स्िर पर प्रयास करने की मांग करिा है। ’योजना’ के मूलभूि ित्िों पर अपनी सुिढ़ृ पकड़ के साथ बड़ी संख्या में वमत्रगि इसकी आिश्यकिाओं को लेकर सदक्रय हो रह ेह ैंऔर अपने प्रत्युत्तर की गुिित्ता में िढ़ृिा और त्याग की भािना झलका रह ेह।ैं जैसी दक कल्पना की गई थी, लम्बे समय से वनरंिर चलाए जा रह ेकुछ गहन विकास कायक्रषम ज्ञान और संसािनों के भंडार बनिे जा रह ेहैं, िे आस-पास के क्षेत्रों को सहायिा ि ेरह ेहैं और अनुभि एिं अंििवषृि के िेजी स ेसवंििरि को सहज बना रह ेह।ैं गहन गविविवि के केन्द्र – यानी िे पड़ोस एिं गांि जहां समुिाय-वनमाषि का कायष सिाषविक सकंेवन्द्रि ह ै– सामूवहक रूपांिरि की उिषर भूवम सावबि हो रह ेह।ैं सहायक मंडल सिस्यों की एक विस्िृि और ऊजषवस्िि सेना और उनके सहायकगि िमाषनुयावययों के प्रयासों को उत्प्रेररि करन ेमें जुटे हुए हैं, उन्ह ेंयह पररकल् पना प्राप्त करन ेम ें मिि ि ेरह ेह ैंदक विविि पररवस्थवियों में और प्रत्येक समुिाय-समूह (क्लस्टर) की अपनी वस्थवियों के अनुरूप विकास-प्रदक्रया को कैसे आगे बढ़ाया जाए। अपनी-अपनी राष्ट्रीय आध्यावत्मक सभाओं की सहायिा से, क्षेत्रीय बहाई पररर्ि ेंयह सीख रही ह ैंदक एक ही समय में, व्यापक समुिाय-समूहों के अंिगषि, ’योजना’ के आिेग दकस िरह वनर्ममि दकये जायें। िसूरी ओर, कुछ छोटे िशेों में जहां पररर्ि ेंनहीं हैं, इसी कायष की शुरुआि राष्ट्रीय स्िर पर स्थावपि नई संस्थाओं द्वारा की जा रही ह।ै हालांदक, जैसा दक दकसी भी जैविक प्रदक्रया से अपेक्षा की जा सकिी है, कुछ जगहों में िजेी से विकास हो रहा ह ैजबदक कुछ अन्य जगहों में अभी ऐसा होना बाकी है, परन्िु पूरी िवुनया में गहन विकास कायषक्रमों की कुल संख्या अब बढ़न ेलगी ह।ै ििपुरांि, हमें यह िखेकर खशुी हो रही ह ैदक ’योजना’ की गविविवियों की भागीिारी में इसके प्रथम चार चक्रों के िौरान उल्लेखनीय िृवि हुई।
अिः, आन ेिाले िर्ष म ेंक्या होन ेजा रहा ह ैउसके वलए इससे अविक आशाजनक सकंेि भला और क्या हो सकिे ह।ैं और यह दक ‘उनके’ वप्रयजनों ने ‘उनके’ िमष के िायरे के विस्िार के वलए पूरी सत् यिापूिषक प्रयास दकया है, हम ’आशीिाषदिि सौन्ियष’ के वद्वशिाधि ी जन्मोत्सि पर उन्ह ेंइससे अविक उपयुक्त क्या समर्मपि कर सकिे हैं? इस िरह बहाई विश्ि द्वारा मनाए जाने िाले िो वद्वशििार्मर्क समारोहों में से प्रथम अत्यंि ही रोमांचक पररिश्ृय िाला अिसर ह।ै यदि सही ढंग से िखेा जाए िो, हृियों को बहाउल्लाह स े जोड़ने की िवृि से यह िर्ष अकेले ही अब िक का सबस ेबड़ा विश्ि व्यापी अिसर प्रस्िुि करिा ह।ै आगामी महीनों में, सबको इस बहुमल्ूय अिसर का ध्यान रखना चावहए और िसूरों को बहाउल्लाह के जीिन और उनके महान उद्दश्ेय स ेपररवचि कराने के वलए हर जगह विद्यमान संभािनाओं के प्रवि सचिे रहना चावहए। अब बहाई विश् ि के समक्ष वशक्षि का जो अिसर मौजूि ह ैऔर वजसका पूिष रूप से उपयोग दकया जाना चावहए, उसके वलए हर िरह के व्यवक्त के साथ आरंभ दकए जा सकने िाले िािाषलापों के बारे म ें रचनात्मक रूप से विचार दकया जाना चावहए। ऐस ेसाथकष संिािों के क्रम में समझ का विकास होिा ह ैऔर हृिय खुलिे ह ैं– कभी-कभी िुरन्ि। इस सुयोग्य कायष में हर दकसी की भूवमका है, और इस कायष में लगने स े प्राप्त होने िाला जो आनन्ि ह ैउससे दकसी को भी स्िय ंको िंवचि नहीं करना चावहए। हम उस एकमेि ’वप्रयिम’ से याचना करिे ह ैंदक यह सम्पूिष वद्वशििार्मर्की िर्ष इस पवित्रिम और मिुरिम आनन्ि स ेभर जाए: ’ईश् िर के दििस’ के अरुिोिय के बारे में अन्य व्यवक्त से कहन ेका आनन्ि!
वनष्ा ािानों के समुिाय द्वारा वनभाए जान ेिाले अवनिाय षिावयत्ि विश् ि में व याप्ि भ्ावंि, अविश् िास और अनिश्चितता के िािािरि में अब और अत्यािश्यक हो गए ह।ैं िास्िि में, वमत्रों को चावहए दक िे एक ऐसा प्रिीप जलाने के वलए हर अिसर का प्रयोग करें जो मागष को प्रकावशि कर सके और वजससे वचन्िािुर लोगों को आश्ि ासन, वनराशजनों को आशा प्राप्ि हो सके। हमें िमष-संरक्षक द्वारा एक बहाई समुिाय को दिए गए परामशष का स्मरि हो आिा है, िह भी ऐसे शधिों में जो मानों हमारे ही समय के वलए अभीष्ट हो: “अवनष्ट घटनाओं और आपिाओं के िनाि और िबाि के भार से आज जबदक ििमषान युग के समाज का िाना-बाना चरमरा रहा है, आज जबदक एक राष्ट्र को िसूरे राष्ट्र से, एक िगष को िसूरे िगष से, एक प्रजावि को िसूरी प्रजावि से, एक सम् प्रिाय को िसूरे सम् प्रिाय से पृथक करने िाली िरारों को उभारने िाली फूट बढ़िी जा रही है, िो ’योजना’ को दक्रयावन्िि करने िालों को चावहए दक िे अपने आध्यावत्मक जीिन और प्रशासवनक कायषकलापों में इससे भी बढ़कर एकमयिा झलकाए ंऔर अपने सामूवहक उद्यम में गहन प्रयास, आपसी सहयोग एिं सामंजस्य पूिष विकास का और अविक उच् च स्िर प्रिर्मशि करें।“ प्रभुिमष के कायष के आध्यावत्मक महत्ि और िमाषनुयावययों को वजस एकाग्र इराि ेके साथ अपने पािन िावयत्िों को वनभाना चावहए उस पर सिा बल ििेे हुए शोगी एफेन्िी ने यह भी आगाह दकया दक हम राजनीविक वििािों, उलझनों और िकरारों में कोई वहस्सेिारी न करें। एक अन्य अिसर पर उन्होंने आग्रह दकया दक “िे हर िरह के संघिाि और पक्षपाि, वनरथषक वििािों, िच्ुछ संगिनाओं, मुखड़ ेको उत्तेवजि और इस पररििनषशील संसार के ध्यानाकर्मर्ि करन ेिाले क्षविक भािािेशों के िायरों स ेऊपर उाें।‘’ ये सब उन अपररहायष झागों और फुहारों की िरह ह ैंवजन्ह ेंइस अशान्ि और विभक्त समाज को अपने थपेड़ों से वहला रही िरंगें एक के बाि एक बना रही ह।ैं इस िरह के भटकािों में व यस्ि रहने से हमारा बहुि कुछ िांि पर लग जािा ह।ै जैसा दक बहाउल्लाह का हर अनुयायी अच्छी िरह जानिा है, मानिजावि का अवन्िम कल्याि उसके विभेिों को पाटने और उसकी एकिा को िढ़ृिापूिषक स्थावपि करन ेपर वनभषर ह।ै अपने समाज के जीिन में बहाई जो भी योगिान ििे ेह ैंउसका लक्ष्य ह ैएकिा को बढ़ािा िनेा; समुिाय-वनमाषि सम्बंिी उनका हर प्रयास इसी उद्दश्ेय के वलए ह।ै कलह से थक चुके लोगों के वलए, ’महानिम नाम’ की छाया िले पनप रह ेसमुिाय इस बाि का एक जोरिार उिाहरि प्रस्िुि करिे ह ैंदक एकिा से क्या प्राप्ि हो सकिा है।
‘उसके’ इिने सारे वप्रयजनों को वनहारिे हुए, यह िखेिे हुए दक कैसे िे विविि िरीकों से अपना सिषस्ि वनछािर कर रहे ह ैंिादक मानिजावि की एकिा की ध्िजा उन्नि हो सके, हम ’प्रभुओं के प्रभु’ का गुिगान करिे ह।ैं ह ेअत्यंि वप्रय वमत्रों: अब जबदक एक अत्यंि शुभ िर्ष आरंभ हो रहा है, क्या हममें स े प्रत्येक को यह विचार नहीं करना चावहए दक िे कौन-से स्िर्मगक कायष ह ैंवजन्ह ेंकरन ेमें ‘उसकी’ कृपा हम ें सहायिा िगेी?
’आशीवािदत सौ दय’ के ज मो सव की ि शता दी को रेखांिकत करने वाले काय म की िचर थायी भा के वातावरण म हम आपका अिभनंदन करत े ह। त प ात जो कुछ भी ितफिलत आ है उसपर िवचार करने से हम यह दखे ते ह िक आज िव भर का बहाई समुदाय वैसा नह ह ै जैसा िक वह वतमान ’योजना’ के थम छः च के समारंभ के समय था। अपने येय के ित वह पहले स े अिधक जाग क हो चकु ा ह।ै िम और पिरिचत को अपन े सामदु ाियक जीवन के ससं ग म लाने, अपने पास-पड़ोस के लोग और गांव को समिे कत यास म एकजुट हो जान े की ेरणा दने ,े यह अिभ करन े म िक आ याि मक स ाइय को िकस तरह थािय वपणू ावहािरक कायकलाप का प िदया जा सकता ह,ै और सबस े बढ़कर, न केवल उन िश ा के बारे म िजनस े एक नए िव का िनमाण हो सकेगा बि क ’िजसने’ व े िश ाएं द , अथात बहाउ लाह, के बारे म भी बातचीत करन े की िदशा म बहाई समदु ाय की मता म अभतू पूव िवकास का अनभु व आ ह।ै बहाउ लाह के जीवन और उनके ारा सह े गए क के बारे म िविभ वय क , युवा और ब के मुख से कह े गए वृता त ने अनिगनत दय को अिभभूत करके रख िदया। उनम से कुछ लोग ने उनके धम के बारे म और अिधक जानन े की त परता िदखाई। अ य लोग न े सहयोग के वचन िदए। और भी अनेक हणशील लोग अपनी आ था कट करन े के िलए ेिरत ए।
गित का एक भावी सकं ेतक यह था िक असं य जगह पर यह प हो गया िक भधु म रा ीय तर पर अपनी गुमनामी के अधं कार से बाहर आ चकु ा ह।ै शासन-सू का सचं ालन करने वाले अनके नेता और बु लोग ने सावजिनक प स े कहा – और कई बार िनजी तौर पर इस बात को रेखािं कत िकया – िक आज की दिु नया को बहाउ लाह के िवचार-दशन की ज रत ह ै और यह िक बहाइय ारा िकए जा रह े यास शंसनीय ह और उनका िव तार िकया जाना चािहए। हम यह दखे कर खुशी ई िक बहाउ लाह के ित स मान कट करन े और उनके ज म का समारोह मनाने की उ कंठा केवल बहाइय म नह थी – बहाई समदु ाय से बाहर के कुछ लोग ारा भी िवशषे सि मलन का ायोजन िकया गया। ऐसी जगह म जहां अभी भी भुधम के ित श ुता का वातावरण ह,ै वहा ं भी िम गण िनडर बन े रह,े उ ह न े अ भुत लोचपूणता का पिरचय िदया, उ ह न े अपने दशे वािसय को वयं ही स य को परखने के िलए ो सािहत िकया, और अनेक लोग समारोह म सहष शािमल ए। ि शता दी समारोह न े कट प से कला मक अिभ ि य की असीम अिभ ंजना को भी बढ़ावा िदया जो िक उस अिभ ि को ज म दने े वाले मे के ोत का एक भ माण था। इस अवसर पर बहाई समदु ाय ारा सम प स े अपनाए गए दिृ कोण की कृित इस बात को पु करती थी िक िव ापी ’योजना ’ की वतमान ृंखला के आरंभ होने के समय स े दो दशक स े भी अिधक समय म िकतना कुछ सीखा-समझा गया ह।ै ि गत धमानुयाियय न े पहल की, समुदाय सामिू हक यास की भावना के साथ उठ खड़ा आ, और िम न े सं था ारा तयै ार की गई योजना म सु वि थत प स े
अपनी रचना मक ऊजा लगाई। दो शताि दय की समाि को रेखािं कत करन े वाल े वािषको सव ने आन े वाली सदी के िलए समुदाय के िनमाण के काय के िलए बल उ रे ण दान िकया। दसू री ि शता दी की ओर अ सर इस अविध म, थम ि शता दी के दौरान इतन े मे स े बोए गए इन बीज को धैयपूवक पोिषत िकए जान े की ज रत ह ै तािक व े फलीभतू हो सक।
वतमान ’योजना’ के इन दो वष म, हालांिक वाभािवक प से यके दशे म समान प स े गित नह ई ह ै लिे कन गहन िवकास काय म की सं या वतमान िव ापी यास म अिभकि पत पांच हजार की सं या से आध े पर प चं रही ह,ै और यह सं या िजस दर स े बढ़ रही ह ै उसम सतत वृि होती िदख रही ह।ै और भी अिधक गहनता स े दखे ने पर, इस बात के भी आशाजनक सकं ेत दिृ गोचर रह े ह िक ि य , समदु ाय और सं था की शि यां और मताए ं िकस तरह कट हो रही ह। सभी जगह के धमानुयाियय के िलए, ि शता दी समारोह के अनुभव न े यह झलकाया ह ै िक अपने इद-िगद के लोग के साथ रोजमरा के उनके अनके काय- वहार िश ण की चते ना से अनु ािणत हो सकते ह। और हजार गांव और पास-पड़ोस म जसै-े जैसे काय म गितशीलता आती जा रही ह,ै वसै -े वैसे उनम से यके म जीव त सामुदाियक जीवन की जड़ गहराती जा रही ह। ऐसे समुदाय-समूह ( ल टर ) की सं या म अ छी-खासी विृ ई ह ै जहां कायकलाप के इस ढांच े का यादा स े यादा थान म िव तार करन े की णाली अ छी तरह सं थािपत की जाने लगी ह–ै और उसके मा यम से िम को िवकास के एक दायरे म मील के तीसरे प थर को पार करन े की मता हािसल ई ह।ै और बहाई िव के इ ह िश ण -- खास तौर पर बहाउ लाह के िवचार-दशन की ओर लोग के अ सर होन े के बारे म िश ण -- के मोच पर, न केवल लोग बड़ी सं या म बहाई कायकलाप के सतत ापक होत े दायरे म शािमल हो रह े ह बि क िम गण अब यह भी सीख रह े ह िक िकस तरह बड़ े समूह ’महानतम नाम’ के समुदाय के साथ अपनी पहचान बनाते ह। हम दखे ते ह िक ऐसी जगह पर भधु म के शै िणक कायकलाप और अिधक औपचािरक प हण करन े लगते ह यिक साल-दर-साल ब े िनबाध प से एक ेड से दसू रे ेड म आगे बढ़त े रहते ह और िकशोर के आ यािमक सश ीकरण का काय म का एक तर स े दसू रे तर पर प चं जाता ह।ै इन थान म, िश ण सं थान यह सुिनि त करना सीख रहा ह ै िक िनरंतर बढ़ती ई सं या म ब एव ं िकशोर के आ याि मक एव ं निै तक चिर -िनमाण के िलए पया मानव संसाधन तैयार िकए जा सक। लोग की सं कृित म इन मलू कायकलाप म भागीदारी इस तरह समािहत होती जा रही ह ै िक उसे समुदाय के जीवन का एक अिभ पहलू समझा जाने लगा ह।ै अपने िवकास का िज मा वयं उठाने की भावना से स प लोग म एक नई जीव तता का ज म हो रहा ह ै और समाज की िनि यता उ प करने वाली शि यां उनपर बेअसर हो रही ह। भौितक और आ याि मक गित की संभावना अब पाकार लेन ेलगी ह।ै सामािजक यथाथ म बदलाव आन े लगा ह।ै
ि य िम ो, यह सचमुच ’परम ि यतम’ के ित आभार कट करने की बले ा ह।ै ो सािहत होने के अनके कारण ह। लेिकन हमारे सामन े जो अपार दािय व पड़ े ह हम उनस े भली-भांित अवगत ह। आधारभूत प से, जैसािक हमन े पहले भी सकं ेत िदया ह,ै ज री ह ै िक सकै ड़ समुदाय-समूह म ऐसे धमानुयाियय की टोिलयां तैयार होनी चािहए जो, अपने इद-िगद के िम के साथ िमलकर, िवकास को पोषण दान करने और मता-िनमाण के काय पर िनरंतर यान केि त कर सक, और जो अपनी मता एवं अनुशासन ारा कायकलाप की समी ा करने और अपने अनुभव स े सीखने की िविश ता रखते ह । यके थान म – केवल समुदाय-समूह ( ल टर) तर पर ही नह बि क पास-पड़ोस और गांव म भी – ि य का एक सतत ापक होता आ ’नािभकीय िबद’ु तैयार करना और उनका साथ िनभाना अपन े आप म एक बड़ी चुनौती का काय भी ह ै और मह वपणू प स े आव यक भी। लिे कन जहां कह भी ऐसा हो रहा ह ै वहां के पिरणाम बड़ े िवल ण ह।
हम यह दखे कर आ त ह िक भुधम की सं थाएं इस परम आव यकता पर मुखता से िवचार करती ह और गित से ा अतं दिृ य को ापक प से लागू करन े यो य बनाने के िलए व े भावी तौर-तरीके तैयार करने म िनरत ह। इसके साथ ही, रा ीय, ादिे शक एवं थानीय सं थाएं अपने वृह र अनुभव से स प होकर ापक दिृ कोण अपना रही ह। वे समुदाय के िवकास के सभी पहलु म सलं हो रही ह और समुदाय के औपचािरक सद य स े भी परे वे सभी लोग के क याण से वा ता रखती ह। लोग के िवकास की िदशा म सं थान- ि या के गहन अिभ ाय के ित सजग, व े इस बात पर खास यान दते ी ह िक िश ण सं थान को कैस े मजबूत बनाया जाए। ’योजना’ की आव यक बात पर समुदाय का यान केि त िकए रखन े की ज रत को वे सतत प से समझती ह और िनरंतर ापक होत े ए िम के दायरे को एकता के उ स े उ तर तर का पश करन े का आ वान करती ह। अपनी शासिनक एव ं िव ीय णािलय को बेहतर से बेहतर बनाने की िज मेदारी का वे िन ापूवक यान रखती ह तािक िव तार और सुगठन के काय म समुिचत सहायता दी जा सके। इन तमाम काय म, अंततः उनका यान समुदाय के अंतगत बल आ याि मक शि य को कट करने वाली अनकु ूल ि थितय के सृजन पर केि त रहता ह।ै
समुदाय-िनमाण के काय म गहनता आने के साथ-साथ, िम गण अपने आस-पास के समाज की दशा को बेहतर बनान े के िलए अपनी नव-िवकिसत मता का उपयोग करन े लगे ह, और इस काय म उनका उ साह िद िश ा के अ ययन स े अनु िे रत होता ह।ै अ पकािलक ोजे ट की सं या काफी बढ़ी ह,ै औपचािरक काय म के दायरे म िव तार आ ह ै और िश ा, वा य, कृिष तथा अ य े म अब और भी अिधक बहाई- ेिरत िवकास सं थाए ं सामने आ रही ह। इन सबके पिरणाम व प लोग के ि गत और सामुदाियक जीवन म जो पांतरण िदखाई पड़ने लगा ह ै उसे बहाउ लाह के धम की समाज-िनमाणकारी शि के अचकू उ ले न के प म समझा जा सकता ह।ै इसिलए, इसम कोई आ य की बात नह िक सामािजक काय के ऐसे ही उदाहरण से – चाह े वे सरल ह या जिटल, थायी या दीघकािलक – समाज के बारे म मौजदू ा पिरसंवाद म भाग लेने के अपने यास म बहाई अंतरा ीय समुदाय के कायालय िनरंतर रे णा हण करते आ रह े ह। भुधम के िलए कायकलाप का यह एक अ य े ह ै
िजसका अ छा िवकास आ ह।ै रा ीय तर पर, समाज के िलए साथक पिरसंवाद – जसै े अ य िवषय के साथ ही
ी-पु ष की समानता, वासन और एकीकरण, सामािजक पातं रण म युवा की भिू मका, और धािमक सहअि त व -- म पहले स े अिधक आ मिव ास, स मता और अंतदिृ के साथ योगदान िदया जा रहा ह।ै और सभी आयुवग और पृ भिू मय के धमानुयायी जहां कह भी रहते, काम करत,े या अ ययन करते ह, वे बहाउ लाह के िवराट कटीकरण से पाियत एक आदश पिर े य की ओर अपन े आस-पास के लोग का यान आकिषत करते ए, खास पिरसंवाद म अपना अमू य योगदान द े रह े ह।
िजन िविवध अवसर पर य े पिरसंवाद तुत िकए गए ह उनम भुधम के दिृ कोण को समृ करन े म व ड वाइड वेब पर इसकी मौजूदगी से काफी भाव पड़ा ह ै जो िक अनके रा ीय वेबसाइट आरंभ िकए जाने और बहाई.ऑग से जुड़ी अ य अनके साइट के कारण और भी िव तृत हो गई ह।ै भधु म के सार और उसकी संर ा इन दोन ही दिृ य स े इसका अ यिधक मह व ह।ै बहाई ि शता दी वेबसाइट पर तुत एवं एक ही समय नौ भाषा म अपडटे की गई बहाई धम स बंधी सु वि थत िवषय-साम ी ने,कुछ ही िदन के अंतराल म, परू ी दिु नया से िवशाल सं या म लोग को आकिषत िकया। अब इस वेबसाइट को अलग-अलग दशे के पेज स े पिर कृत कर िदया गया ह ै और िविवध कार के समारोह के सिच िववरण तुत िकए गए ह। अब बहाई रेफरस लाय ेरी साइट म एक िविश ता तुत करन े की योजना का काफी िवकास हो चकु ा ह ै िजसस े ’पिव लेख ’ के ऐस े अंश या ’पाितय ’ को ऑनलाइन प से जारी करने की सिु वधा ा होगी िजनका पहल े कभी अनुवाद या काशन नह आ ह।ै इसके साथ ही, आगामी वष म बहाउ लाह और अ दलु -बहा के लेख के अं ेजी म अनूिदत नए खंड के काशन की तैयारी हो रही ह।ै
सिटएगो (िचली) और बैटमबग (कंबोिडया) म हाल ही म िव को समिपत िकए गए बहाई उपासना मि दर अब आकषण के थायी क बनते जा रह े ह और वे अपन े समाज के लोग को भधु म के सम त तीक की ओर सकं ेितत करन े वाल े काश- तंभ बन गए ह। इन उपासना-गृह की सं या बढ़न े वाली ह।ै हम यह घोषणा करत े ए हष हो रहा ह ै िक नॉट डले कॉसा (कोलि बया) के मि दर का लोकापण समारोह जलु ाई म होन े वाला ह।ै उसके बाद, और भी उपासना मि दर का िनमाण अब ब त दरू नह ह।ै वैनुएतू म भवन-िनमाण की अनमु ित ली जा रही ह।ै भारत तथा कांगो गणरा य म, अ यतं ही जिटल और दु ह ि या से गुजरने के बाद, अंततः हम भिू म के अिध हण की ओर कदम बढ़ा चकु े ह। पापआु य ू गायना के थम रा ीय मशिरकुल-अज़कार की िडजाइन के अवलोकन स े उ प हष अभी समा भी नह हो पाया था िक के या के थानीय उपासना मि दर का िडजाइन भी सामने आ गया। साथ ही, हम पूरी उ मीद ह ै िक मशिरकुल-अज़कार की सं था के बारे म हमारे शोध िवभाग ारा हाल ही म जारी िकया गया व सामुदाियक जीवन म उपासना के मह व के बारे म िम की समझ को ेिरत करेगा, य िक सेवा के अपन े सभी काय म, खास तौर पर अपने िनयिमत भि परक सि मलन म, हर जगह के बहाई बंधु भिव य के उपासना मि दर की आ याि मक बुिनयाद कायम कर रह े ह।
एक-ितहाई शता दी के अिभयान के परू ा होने म िसफ तीन वष रह गए ह िजसकी शु आत 1996 म की गई थी और जो एक ही ल य पर केि त था: समूह ारा भुधम को वीकार िकए जान े (इं ी बाइ स) की ि या म मह वपणू गित। िरज़वान 2021 म बहाउ लाह के अनुयायी एक वष की एक ’योजना’ का समारंभ करगे, लेिकन शभु सकं ेत से भरा यह एक-वष य कायकलाप ’योजना ’ की एक नई लहर को ज म दगे ा िजससे भधु म की नौका बहाई यगु की तीसरी शता दी म प चं जाएगी। बारह महीन की इस मांगिलक अविध म अ दलु -बहा के िनधन की शता दी के िव ापी आयोजन के म म बहाई िव क म एक िवशषे सि मलन भी शािमल होगा िजसके िलए यके रा ीय आ याि मक सभा और हर े ीय बहाई पिरषद के ितिनिध आमिं त िकए जाएंगे। लिे कन यह उन काय म की ृंखला म पहला काय म होगा जो िक धमानुयाियय को आने वाल े दशक की मांग को परू ा करन े के िलए तैयार करगे। आगामी जनवरी म, ि य मा टर के ’इ छाप और वसीयतनामा’ के थम सावजिनक पाठ के सौ वष पूरे हो जाएंगे और उस अवसर पर सभी महा ीपीय सलाहकार मंडल और सार एव ं संर ा के िलए िनयु सभी सहायक मंडल सद य को एकि त करते ए पिव भूिम म एक अिधवेशन आयोिजत िकया जाएगा। इन दो ऐितहािसक स मेलन स े िनगत आ याि मक ऊजा को उसके बाद यके भभू ाग म रहन े वाल े भ ु के िम के पास ल े जाया जाएगा। इस उ े य की दिृ से, उसके बाद के महीन म, आगामी ’एक वष य योजना’ के बाद के अनके वष के अिभयान म पिरवतन के संवाहक के प म, परू ी दिु नया म अिधवेशन की एक पूरी ृंखला आयोिजत की जाएगी।
इस तरह, ि य मा टर की ’िद योजना’ के कटीकरण की िदशा म एक नया चरण तुत होने वाला ह।ै लेिकन उसस े भी अिधक उ साहव क एवं यादा ज री पिरदृ य अभी सीधे सामने खड़ा है। बाब के ज म की ि शता दी म मा डढ़े वष बाकी ह। यह वह अविध ह ै जब हम अपन े धम के शहीद-िशरोमिण एवं अ दतू की असाधारण शूरता को याद करगे िजनके अित मह वपूण धमनेतृ व-काल न े मानवजाित को इितहास के एक नए युग म ला खड़ा िकया। यिद हम अ याचार के भाव और अनके लोग म ान पाने की आ मा की िपपासा को शातं करन ेके िलए समाधान पाने की जो उ कंठा ह ै उस दिृ से दखे तो दो शता दी के अतं राल के बावजूद वह समाज िजसम बाब का आिवभाव आ था, आज के ससं ार स े ब त कुछ िमलता-जुलता ह। इस दो सौ वष य वािषको सव को समिु चत तरीके स ेकैसे मनाया जाए इसपर िवचार करत े ए हम यह मानत ेह िक इन समारोह का एक िवशेष ल ण होगा। तथािप, हम आशा करत े ह िक कायकलाप का फुटन अभी-अभी गुजरे वािषको सव स े कम समृ और कम समावेशकारी नह होगा। यह एक ऐसा अवसर ह ै िजसकी उ सकु तापूण ती ा िन संदहे हर समुदाय, हर घर-पिरवार, हर दय को रहगे ी।
आन े वाल े माह बाब के शूर-वीर अनुयाियय के जीवन के पु य- मरण का भी काल ह ग े – उन वीर ि य और पु ष को याद करन े की अविध िज ह न े अपनी िन ा को ऐस े अनपु म एवं यागपणू कृ य के मा यम स े कट िकया था जो सदा-सदा के िलए भुधम के इितहास को िवभूिषत िकए रहगे। िनडरता, पावनता और ई र के िसवा अ य सबस े अनासि के उनके गुण उन सभी लोग को भािवत करके रख दते े ह जो उनके कारनाम के बारे म सुनत े ह। और यह भी िकतना िव मयकारी है िक शेर जसै े जांबाज ऐसे अनिगनत लोग अ यंत युवाव था म ही इितहास म अपनी अिमट िनशानी छोड़कर चले गए। आने वाली अविध म, उनके आदश आ थावान के सम त समूह को साहस दान कर – न
िक केवल युवा को िजनका एक बार िफर आ वान िकया जाता ह ै िक वे उस आंदोलन के अ नायक बन िजसका उ े य िव के पांतरण से कम कुछ नह ह।ै
अतः यही ह ै हमारी खर, ददे ी यमान आशा। इस िरज़वान से लके र अगली ि शता दी के बीच के छः च म – और, व तुतः, वतमान ’योजना’ की शेष तीन वष की सम त अविध म – वही उ कट एव ं चरम ेम आपको भी महान काय की िदशा म ेिरत करे िजसस े िद काश के सार के िलए बाब के अनुयायी अनु ािणत ए थ।े पिव दहलीज पर हमारी ाथना ह ै िक आपको विगक सहायता ा हो।
अब जबकि ’परम महान उत्सव’ निकट आ चुका है, हम आभार और आशा की भावनाओ ंसे अत्यतं आह्लादित हैं--आभार उन अद्भतु कार्यों के लिए जिन्हे ंपूरा कर पाने मंे बहाउल्लाह ने अपने अनुयायियांे का ेसक्षम बनाया है, आरै आशा उन बातांे के लिए जा ेनिकट भविष्य के गर्भ मं ेहैं।
बहाउल्लाह के जन्म के द्विशताब्दी समारोह के विश्वव्यापी आयाजेनो ंसे उत्पन्न गति तब से बढत़ी ही चली गई है। बहाई समुदाय के विकास मंे आई तेजी, उसकी बढ़ती हुई क्षमता, और अपने अधिक से अधिक सदस्यांे की ऊर्जाओ ंसे लाभ उठा सकने की उसकी याग्ेयता उसके हाल की वैश्विक उपलब्धियो ंसे स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आई है। इन सबमंे, समुदाय-निर्माण सम्बंधी कार्यकलापो ंमंे जा ेप्रगति हुई है, वह खास तारै पर उल्लेखनीय है। वर्तमान पांच वर्षीय योजना बहाई विश्व द्वारा बीस वर्षांे तक किए गए उन प्रयासो ंका अनुसरण करती है जबकि कार्यकलापो ंका ेसुव्यवस्थित तरीके से बेहतर बनाने और उनकी संख्या मंे वृद्धि करने के प्रयत्न किए गए--किन्तु उल्लेखनीय यह है कि, याजेना के आरंभिक ढाई वर्षों में ही, केवल मलू कार्यकलापो ंकी संख्या मंे आध ेसे भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। किसी भी खास समय मे,ं वैश्विक समुदाय ने एसेी गतिविधियांे मंे, आध्यात्मिक सच्चाइयांे की तलाश करने और उनका प्रत्युत्तर देने मंे उन्हे ंसहायता प्रदान करते हुए, दस लाख से भी अधिक लागेां ेका ेसंलग्न कर सकने की अपनी क्षमता का परिचय दिया है। उसी संक्षिप्त समयावधि मंे, प्रार्थना-सभाआंे की संख्या लगभग दागेुनी हो गई--जो कि आशा और उदार कृपा के ’मूल स्राते’ से मानवजाति की बढ़ती हुई दूरी के लिए एक अति आवश्यक प्रत्युत्तर था। यह जा ेप्रगति हुई है उसकी एक विशष्ेा संभावना है, क्यांेकि भक्तिपरक सम्मिलन समुदाय के जीवन मंे नई चतेना का संचार करते हैं। सभी आयुवर्ग के लोगांे के लिए शैक्षणिक प्रयासांे को पिरोते हुए, व ेउन प्रयासांे के इस उच्च उद्दश्ेय का ेबल प्रदान करते हैंः ऐस ेसमुदायांे का पाष्ेाण करना जिनकी खासियत है परमात्मा की उनकी उपासना आरै मानवजाति की सेवा। यह बात उन समुदाय-समूहांे से ज्यादा अन्य कहीं उतनी अधिक स्पष्ट नहीं है जहां बहाई गतिविधियांे मंे बड़ी संख्या मंे लागेो ंकी भागीदारी का ेजारी रखा गया है और जहां मित्रगण अपने समुदाय के विकास के तीसरे मील के पत्थर को पार कर चुके हैं। हम यह देखकर खुश हैं कि जहां विकास की प्रक्रिया इस हद तक आग ेबढ़ चुकी है एसेे समुदाय-समूहांे की संख्या ‘याजेना’ के आरंभ से लेकर अभी तक दागेुनी से भी ज्यादा हो गई है और अब उनकी संख्या लगभग पाचं सौ है।
रूपातंरण की जो प्रक्रिया अभी जारी है उसके पैमाने का ेमापने मंे यह संक्षिप्त सर्वेक्षण न्याय नहीं कर सकता। ‘याजेना’ के बचे हुए दा ेवर्षांे का परिदृश्य बड़ा ही उज्ज्वल है। उन समुदाय-समूहांे मंे जा,े हमारी आशा के अनुरूप, ज्ञान और संसाधनो ंके भंडार बन चुके हैं, सुदृढ़ विकास-कार्यक्रमो ंसे सीखे गए पाठो ंके व्यापक संवितरण के माध्यम से, इस पिछले वर्ष बहतु कुछ हासिल किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण केद्रं, सलाहकारगण, और उनके अथक सहायक मडंल सदस्य यह सुनिश्चित करने के लिए अनवरत प्रयास करते रह ेहैं कि दुनिया के सभी हिस्सों मंे निवास करने वाले बंधु ज्ञान मंे हुई इस समृद्धि से लाभान्वित हो ंऔर जा ेअंतर्दृष्टियां प्राप्त हो रही हैं उन्हे ंव ेअपने यहाँ की वास्तविकताआंे मंे क्रियान्वित करे।ं हम यह देखकर आनन्दित हं ैकि बढ़ती हुई संख्या मंे समुदाय-समूहांे, और उनके अंतर्गत आने वाले गावंांे और पास-पड़ोसांे मंे, मित्रों का एक नाभिकीय-बिंदु उभर कर सामने आया है, जा ेअपने क्रिया और समीक्षा के माध्यम से किसी खास समय मंे अपने आस-पास विकास की प्रक्रिया की प्रगति के लिए आवश्यक तत्वो ंकी तलाश मंे जुटे हैं। व ेसंस्थान रूपी सक्षम उपकरण से संबल प्राप्त कर रह ेहैं जिसके माध्यम से समुदाय की आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि मंे यागेदान देने की क्षमता का विकास हो रहा है, और उनकी सक्रियता के कारण, उनके साथ भागीदारी निभाने वाले मित्रों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वाभाविक बात है कि अलग-अलग स्थानो ंमे ंइन स्थितियांे मंे अन्तर है, और साथ ही विकास सम्बंधी विशष्ेाताआंे मंे भी फर्क है। लेकिन सुव्यवस्थित प्रयास के माध्यम से, हर र्काइे मौजूदा कार्य मे ंअपना अधिक से अधिक प्रभावी यागेदान दे सकता है। हर परिवेश मंे, अन्य लागेांे का ेएसेे सार्थक और उत्प्ररेक वार्तालापो ं मंे शामिल करना एक विशद्धु आनन्द का विषय है जा,े शीघ्र या क्रमिक रूप से, आध्यात्मिक संवदेनाआंे को स्पंदित करने की दिशा मंे ले जाते हों। आस्थावान व्यक्ति के हृदय मंे जितनी ही प्रखर लौ प्रज्ज्वलित की जाएगी उसकी उष्मा के संसर्ग मंे आने वाले लागेों द्वारा महसूस की जाने वाली आकर्षण की शक्ति भी उतनी ही प्रबल होगी। और जो हृदय बहाउल्लाह के प्रमे से अनुप्राणित है उसके लिए एसेे आत्मीय चतेना-सम्पन्न लोगांे की तलाश, सेवा के पथ पर अग्रसर होने पर उन्हे ंप्रात्ेसाहित करने, जब व ेअनुभव प्राप्त कर ले ंता ेउनका साथ निभाने और--संभवतः सबसे ज्यादा आनन्द का विषय--उन लागेां ेका े प्रभुधर्म मे ंपुष्ट होते, स्वतंत्र रूप से सेवा के लिए उठ खड़ ेहोते और उस समान यात्रा मंे अन्य लागेां ेकी सहायता करते हुए देखने से ज्यादा उपयुक्त किस कार्य की कल्पना की जा सकती है! इस क्षणभंगुर जीवन मंे ये ही सबसे ज्यादा अभिलषित क्षण हैं।
बाब के जन्मात्ेसव की द्विशताब्दी पास आने के कारण इस आध्यात्मिक उद्यम का ेआगे बढ़ाने के परिप्रेक्ष्य और भी अधिक रोचक बन गए हैं। इससे पहले वाली द्विशताब्दी की तरह ही, यह वार्षिकात्ेसव भी एक अपरिमित रूप से मल्ूयवान अवसर है। यह सभी बहाईयांे का ेअपने आस-पास के लागेों का े’ईश्वर के महान दिवस’ के प्रति, ’दिव्य अस्तित्व’ के दा ेप्रकटावतारो,ं विश्व के क्षितिज का ेदीप्तिमान बनाने वाले एक के बाद एक आने वाले दा े’प्रखर नक्षत्रांे’, द्वारा संकेतित स्वर्गिक कृपा के असाधारण प्रवाह के प्रति, जागरूक करने के लिए विलक्षण अवसर उपलब्ध कराता है। दा ेवर्ष पूर्व मनाए गए द्विशताब्दी समारोह के अनुभवांे के कारण, आने वाले दा ेचक्रो ंमें क्या कुछ संभव हो सकता है उसका परिमाप सबको ज्ञात है, और उस अवसर पर जो कुछ भी सीखा-समझा गया उन सबका ेइस वर्ष मनाए जाने वाले ’युगल पावन जन्मात्ेसवांे’ के लिए सुनियोजित किया जाना चाहिए। अब जबकि दा ेसौवें वर्ष का वार्षिकात्ेसव निकट आ रहा है, हम आपकी ओर से ’पवित्र समाधियांे’ पर निरन्तर वन्दना करेगं,े और यह प्रार्थना करेगं ेकि बाब का े समुचित सम्मान देने के लिए आपके द्वारा किए जाने वाले प्रयास ’उनके’ द्वारा पूर्वघाेिषत धर्म को और आग े बढ़ाने मंे सफल हो।ं
रचनात्मक युग की प्रथम शताब्दी के समापन मंे अब सिर्फ ढाई वर्ष रह गए हैं। इसके साथ ही, प्रभुधर्म के शौर्य काल के दौरान अत्यंत त्याग की भावना से रखी गई प्रभुधर्म की बुनियाद को सुदृढ़ करने और उसके विस्तार के लिए किए गए पावन प्रयासांे के सौ वर्षांे की परिसमाप्ति हो जाएगी। उसी समय बहाई समुदाय अब्दुल-बहा के स्वर्गाराहेण की शताब्दी भी मनाएगा--उस क्षण की शताब्दी जब प्रिय मास्टर स्वर्गिक महिमा की आश्रय-स्थली में ‘अपने पिता’ से पुनर्मिलन के लिए इस संसार की सीमाआंे से मुक्त हो गए थे। अगले ही दिन सम्पन्न हुई उनकी शव-यात्रा एक ऐसी घटना थी “जैसी फिलिस्तीन ने पहले कभी नहीं देखी थी।“ इसकी समाप्ति पर, उनके पार्थिव अवशष्ेाांे का ेबाब की समाधि के एक प्रकोष्ठ मंे चिर-विश्रान्ति के लिए रख दिया गया था। लेकिन शागेी एफन्ेदी की परिकल्पना यह थी कि यह एक अस्थायी व्यवस्था होगी। उपयुक्त समय आने पर, एक एसेी समाधि का निर्माण किया जाना था जिसकी विशष्ेाता अब्दुल-बहा के अद्वितीय पद के सुयाग्ेय हा।े
अब वह समय आ गया है। बहाई विश्व का आह्वान किया जाता है कि वह एक एसेे भवन का निर्माण करे जहां सदा-सदा के लिए उन अवशष्ेाांे का ेस्थापित किया जा सके। उसका निर्माण रिज़वान के उद्यान के निकट होना है उस भूिम पर जा े’आशीर्वादित सौन्दर्य’ के चरण-चिह्नो ंसे पावन हुई है; इस तरह अब्दुल-बहा की समाधि अक्का और हाइफा की पवित्र समाधियांे के बीच के अर्द्ध-चद्रंाकार से दिखते स्थान मंे अवस्थित हागेी। भवनशिल्प की याजेनाआंे पर काम आगे बढ़ रहा है, और आने वाले महीनों मंे और अधिक सचूनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
और अब जब हम आने वाले वर्ष और उसकी संभावनाआंे पर ध्यान केन्द्रित करते हैं ता ेहमारे मन मे ं अत्यधिक हर्ष की भावना उमड़ उठती है। आप में से प्रत्यके व्यक्ति से--उन सबसे जा ेबहाउल्लाह की सेवा मंे जुटे हुए हं,ै जा ेहर राष्ट्र मंे शांित के ध्येय के लिए प्रयासरत हैं--हम आशा करते हैं कि आप अपने महान दायित्व को पूरा करेगं।े
दो उभरती ई स ाइय न े हम आपको इन श द से सबं ोिधत करने के िलए ेिरत िकया ह।ै पहली स ाई ह ै कोरोना वायरस महामारी ारा संवािहत चुनौतीपूण एवं भयावह खतर के बारे म दिु नया भर म बढ़ती ई जाग कता। अनेक दशे म, इस आपदा की रोकथाम के िलए साहस एवं दढ़ृ संक प भरे सामूिहक यास के बावजूद, ि थित पहले ही गंभीर हो चकु ी है और पिरवार एवं ि य के िलए दखु की रचना करती ई सभी समाज को संकट म डुबोए जा रही है। एक के बाद एक, कई जगह से दखु और क की लहर उमड़ती चली आ रही ह जो िविभ समय म, िविभ तरीक स,े िविभ रा को जजर बनाकर रख दगी।
दसू री स ाई -- जो िक िदन- ितिदन यादा से यादा प होती जा रही ह ै -- वह ह ै एक ऐसे चुनौती भरे समय म, िजसके समान हमारे जीते जी हमारी मृित म शायद ही कभी सामने आया था, बहाई िव की लोचपूणता और उसकी अथक शि । आपका यु र अ भुत रहा ह।ै एक महीने पहले जब हमन े नौ ज़ के समय आपको प िलखा था तो हम उन भावपूण िवशेषता को रेखािं कत करने के िलए उ सुक थ े िजनकी झलक उन समुदाय ारा िदखाई जा रही थी िजनके कायकलाप का सामा य ताना-बाना व त हो चुका था। बीच के स ाह म, जबिक अनेक िम को िनत स त से स त ितबंध का अनुपालन करना पड़ा, जो कुछ भी प प से दिृ गोचर आ ह ै उससे हमारी शंसा की भावना और अिधक गहरी ई ह।ै दिु नया के अ य िह स म ा िकए गए अनुभव से सबक सीखते ए, कुछ समुदाय ने अपने-अपने जनसं या े के दायरे म लोक वा य से जुड़ी आव यक बात के बारे म जाग कता उ प करने के सुरि त एवं रचना मक तरीके खोजे ह। उन लोग पर िवशेष यान िदया जा रहा ह ै जो वायरस और उसके सं मण से उ प आिथक मसु ीबत से सबसे यादा जोिखम म ह। इस िसलिसले म बहाई व ड यूज़ सिवस पर िजन यास की झलक िदखाई गई ह ै वे इसी तरह से जारी अ य अनिगनत यास के चंद उदाहरण मा ह। इन उप म के साथ-साथ, इस समय िजन आ याि मक गुण की िनता त आव यकता ह ै उ ह परखने, ो सािहत करने और उनके िवकास के िलए भी अनेक यास िकए जा रह े ह। अिनवायतया, ऐसे अनेक यास अकेले म या पिरवार की इकाई म िकए जा रह े ह, लेिकन जहां भी ि थितया ं अनुकूल ह अथवा संचार के साधन के कारण ऐसा करना संभव ह,ै वहां इन समान पिरि थितय को भोग रह े ि य के बीच सि यता के साथ असाधारण एकता की भावना का संचार िकया जा रहा ह।ै सामूिहक गित के िलए अ यंत मह वपूण, सामुदाियक जीवन की ग या मकता को दबाया नह जा सकेगा।
यह दखे कर हमारी चेतना उड़ान भरती ह ै िक ’ काश की सेना’ के इन अद य सने ानायक , हमारी रा ीय आ याि मक सभा , ने िकतनी स मता के साथ अपने समुदाय को मागदशन और इस संकट के ित उनकी िति या को िदशाबोध िदया ह।ै इस काय म उ ह सलाहकार और उनके सहायक से सुदढ़ृ सहायता ा ई ह ै िज ह ने सदा की तरह ेमपणू सेवा की वजा को वीरतापूवक ऊंचा उठाए रखा ह।ै अपने-अपने दशे म अ सर तेजी से बदलते ए हालात की अ छी तरह जानकारी रखते ए, आ याि मक सभा ने भुधम के मामल के शासन के िलए, और जहां भी संभव हो सका है वहां खास तौर पर चुनाव के संचालन के िलए, आव यक बंध िकए ह। िनयिमत संवाद के मा यम से सं था और एजिे सय ने िववेकपूण परामश तुत िकए ह, िदलासा भरे आ ासन और सतत ो साहन िदए ह। कई मामल म, उ ह ने भी अपने समाज म चिलत पिरसंवाद स े उभरते ए रचना मक िवषय की पहचान शु की ह।ै अपने नौ ज़ संदशे म हमने जो उ मीद जािहर की थी िक मानवजाित की सहनशीलता की यह परी ा उसे यादा गहन अंतदिृ स े स प बनाएगी, वह अब साकार प लेने लगी ह।ै अ णी लोग, मुख िवचारक और ा याकार अब उन बुिनयादी संक पना और मुखर अिभलाषा की टोह लेने लगे ह जो हाल के िदन म लोग के पिरसंवाद से िब कुल गायब थ । िफलहाल, ये तो बस कुछ शु आती िझलिमलाहट ह, िकतु िफर भी उनम यह संभावना िनिहत ह ै िक सामूिहक जागृित का एक दौर सामने आएगा।
बहाई जगत ारा ि या मक प से झलकाई गई लोचपूणता को दखे कर हम जो तस ली िमल रही ह ै उसके साथ ही मानवजाित के िलए इस महामारी के पिरणाम स े हम िथत ह। अफ़सोस, हम जानते ह िक बहाई धमानुयायी और उनसे जुड़े लोग भी इस क के साझेदार ह। लोग के वा य की आव यकता के म ेनज़र आज दिु नया के अनेक लोग अपने दो त और सगे-स बंिधय स े जो दरू ी और अलगाव बनाए ए ह, वह, कुछ लोग के िलए, सदा-सदा के िलए अलगाव बनकर रह जाएगा। हर सुबह यह बात प ी लगती ह ैिक सूय ढलन े स े पहले न जान े और िकतनी यातनाएं झेलनी ह गी। अन त लोक म पुनिमलन का वादा उन लोग को सां वना दान करे जो अपने ि यजन को खो देते ह। हम उनके दय की सां वना के िलए ाथना करते ह और याचना करत े ह िक परमा मा की क णा उन सबको आ छािदत करे िजनकी िश ा, आजीिवका, घर-बार, और यहां तक िक उनके जीिवत रहने के मूल साधन ही आज खतरे म पड़ गए ह। आपके िलए, आपके ि यजन , और आपके सम त दशे वािसय के िलए, हम बहाउ लाह स े िवन ाथना करते ह और उनके आशीवाद और उनकी कृपा के िलए िवनती करते ह।
वह पथ िजसपर हम चलना ह ै वह चाह े िकतना ही ल बा और किठन य न हो, हम इस या ा को परू ा करने म आपके पौ ष और दढ़ृ संक प पर परम िव ास ह।ै दसू र की ज रत को अपनी ज रत से यादा मह व दते े ए, वंिचत लोग को आ याि मक पोषण दान करत े ए, जो लोग उ र के िलए सतत यासे ह उ ह संतुि दते े ए, और िजनके मन म िव को बेहतर बनाने के िलए काय करने की ललक ह ै उ ह उसके साधन उपल ध करात े ए, आप आशा, िन ा और उदारता के भंडार स े ेरणा हण कर। ’आशीवािदत पूणता’ के समिपत अनुयाियय से हम इससे कम की आशा कैस े कर सकते ह?
तैयारी और च ंतन के साथ-साथ अत्यंत पररश्रम का एक िर्ष समाप्त हो गया, जो अब्िलु-बहा के
स्िगाषरोहण के शताब्िी िर्ष को रेखांदकत करने के वलए विश्व भर के वमत्रों के ियासों के वलए विवशष्ट है, वजसमें उनको सम्मान िने े के वलए आयोवजत एक विशेर् कायषक्रम में भाग लेने के वलए िवतवनवियों को पवित्र भूवम में भेजना शावमल है। इन ियासों के माध्यम स ेअब्िलु-बहा के जीिन द्वारा िी जाने िाली िेरणा को न केिल बहाईयों ने, बवकक अनवगनत आत्माओं ने अनुभि दकया ह।ै मानि पररिार के ित्येक सिस्य के िवत उनकी च ंता, उनका वशक्षण कायष, वशक्षा और समाज की बेहतरी के वलए उपक्रमों को दिया गया बढािा, पूिष और पविम िोनों ही के संिािों में उनका गहन योगिान, उपासना स्थल वनमाषण पररयोजनाओं हते ु उनका हार्िकष िोत्साहन, उनके द्वारा बहाई िशासन के िारवम्भक रूप को दिया गया आकार, सामुिावयक जीिन के विवभन्न पहलुओं का संििषन — यह सभी उनके जीिन के पूरक पक्ष ईश्वर की सेिा और मानिता की सेिा के िवत उनके सतत और पूणष समपषण का िवतचबंब थे। नैवतक अविकार की एक बडी हस्ती और श्रेष्ठ आध्यावत्मक अंतिवषद ष्टिारक होने के साथ-साथ, अब्िलु-बहा एक शुद्ध माध्यम थे वजसके द्वारा बहाउकलाह के िकटीकरण स े वनमुषक्त शवक्तयां पूणष विश्व पर कायष कर सकती थीं। िभुिमष की समाज-वनमाषण शवक्तयों को समझने के वलए, दकसी को 'अब्िलु-बहा' के मंवत्रत्िकाल में िाप्त उपलवब्ियों और उनकी कलम से अविरत ििावहत मागषिशषन के रूपांतरकारी िभाि से आगे िखे ने की आिश्यकता नहीं ह।ै ितषमान बहाई समुिाय द्वारा दकए गए अनेक अद्भुत विकास-वजनका वपछले ररजिान में आपको भेजे गए हमारे संिशे में सिेक्षण दकया गया था—अपनी उत्पवि अब्िलु-बहा के कायों, वनणषयों और वनिशे ों में पात े ह।ैं दकतना उपयुक्त ही होगा दक बहाई समुिाय अपने पररपूणष उिाहताष को िी जा रही सामूवहक श्रद्धांजवल को एक िदहि उपक्रम के िारंभ की िस्तािना बनाये, जो िभुिमष की सतत महानतर पररमात्रा म ें वनमुषक्त होती समाज वनमाषण शवक्त पर केंदित है। ियास के िे क्षेत्र, जो नौ िर्ीय योजना और योजनाओं की ितषमान श्रदंखला के िायरे म ें आते हैं, इस व्यापक उद्दश्े य की पूर्तष के वलए वनर्िष्टष हैं। यह, इस महान आध्यावत्मक उद्यम के शुभारंभ को व वननत करते हुए विश्व भर में आयोवजत दकए जाने िाले 10000 से अविक सम्मेलनों का केंि-वबन्ि ु भी है। अभतू पूिष संख्या में िवतभावगयों के स्िागत के वलए अपेवक्षत, य े सम्मेलन एक साथ न केिल बहाई बवकक मानिता के कई अन्य शुभच ंतकों को भी साथ ला रह े ह,ैं जो उनके साथ एकता को बढािा
िने े और िवु नया को बेहतर बनाने की लालसा साझा करते हैं। उनका िढद सकं कप और उद्दश्े य की मजबूत भािना अभी तक आयोवजत सम्मेलनों में उत्पन्न ेतना में पररलवक्षत हो रह ेहैं, जहााँ िवतभावगयों को उनके द्वारा दकए गए गत्य ात् मक परामशों में दिए योगिान ने भी उतना ही उत्सावहत दकया है वजतना दक इन आनंिमय आयोजनों में खोजी गई सामूवहक िवद ष्ट ने। हम उत्सुक ित्याशा से िखे रह े ह ैं दक आने िाले महीने और िर्ष क्या ले कर आएगं े।
सलाहकारों के सम्मेलन को संबोवित हमारे 30 दिसंबर 2021 के संिशे के बाि से ही राष्ट्रीय आध्यावत्मक सभाए ाँ तथा क्षेत्रीय बहाई पररर्ि ें नौ िर्ीय योजना के िौरान उनके अविकार क्षेत्र िाले क्लस्टरों में विकास िदक्रया को सघन करने की संभािनाओं का गंभीरता से आकलन कर रही ह।ैं हमें लगता ह ै दक समय के साथ हुई िगवत का आकलन करने के उद्दश्े य स े यह मििगार होगा दक योजना की िगवत को ार और पां साल की अिवि के िो रणों में अनािदत होते िखे ें, और पहले ररजिान 2026 और उसके बाि ररजिान 2031 तक अपने समुिायों की संभावित िगवत पर वि ार करन े के वलए राष्ट्रीय सभाओं को आमंवत्रत दकया गया। इस अभ्यास में क्लस्टर सीमाओं का पुनमूषकयांकन भी शावमल था, और इन समायोजनों का पररणाम यह ह ै दक विश्व में क्लस्टरों की कुल संख्या में एक ौथाई की िदवद्ध हुई ह ै और अब यह 22,000 से अविक हो गई ह।ै िाप्त पूिाषनुमानों के आिार पर, इस आकलन पर पहु ाँ ा गया ह ै दक योजना के अंत तक, इनमें से लगभग 14,000 क्लस्टरों में विकास कायषक्रम का कुछ स्तर आकार ले ुका होगा। यह अनुमान ह ै दक इसी समयािवि में, इनमें से ऐसे क्लस्टरों की संख्या, जहां विकास को सघन माना जा सकता ह,ै बढ कर 11000 हो जाएगी। अनुमान लगाया जाता ह ै दक इन क्लस्टरों में से उनकी सख्ं या, जहां तीसरा मील का पत्थर पार कर वलया गया होगा, 2031 तक 5,000 से अविक हो कु ी होगी। इस पर िश्न नहीं दकया जा सकता दक इस िकार की
िगवत िाप्त करने के वलए योजना की पूरी अिवि में ि ंड ियास करना होगा। दिर भी हम पाते हैं दक य े ियास करने योग्य सुमंगल आकांक्षाए ं हैं, क्योंदक ये उसका िवतवनवित्ि करती ह ैं जो महत्िाकांक्षी तो ह ैपर एक गंभीर आकलन भी ह,ै जो पहु ाँ के भीतर है।
यही िास्तविकता है। ऐसे उद्दश्े यों पर िास्तविक रूप से वि ार भी नहीं दकया जा सकता था यदि िशासवनक संस्थाए ं और एजवें सयां उकलेखनीय रूप से विकवसत नहीं हुई होतीं, जो एक विशाल और बढती संख्या में सािश्द य आत्माओं को गले लगाते हुए, अत्यतं तीव्रता से गवतविवियों को गवु णत करती समुिाय के मामलों का िबंिन करन े की बढी हुई क्षमता स े संपन्न हैं। इस तरह के विकास की आकांक्षा संभि नहीं होती, अगर एक सीखने की अवभलार्ा – कायष करना, समीक्षा करना, अंतिवषद ष्टयों को सहजे ना और अन्यत्र उभरन े
िाली अंतिवषद ष्ट को आत्मसात करना - सभी स्तरों पर, समुिाय के जमीनी स्तर तक, पोवर्त नहीं की गई होती। और, यदि वशक्षण कायष एिं मानि संसािन विकास के वलए एक वनयवमत तरीका बहाई विश्व में बढते रूप में िकट नहीं होता, तो इस तरह के आकलनों के वलए आिश्यक ियास शायि ही संभि होते। इन सभी ने बहाई समुिाय की अपनी पह ान और उद्दश्े य के बारे में जागरूकता विकवसत की है। समुिाय वनमाषण की िदक्रया में िाह्यमुखी होने का संककप अनेकानके स्थानों पर पहले से ही संस्कदवत के पहलू के रूप में स्थावपत हो ुका था; अब यह, स्ियं बहाई समुिाय की सिस्यता स े कहीं परे, बढती संख्या में समुिायों की आध्यावत्मक और भौवतक
िगवत के वलए समाज के भीतर बडे-बडे समूहों की िास्तविक वजम्मेिारी की भािना में पुवपपत हो ुका है। समुिायों के वनमाषण में, वमत्रों के ियास, सामावजक कायों में संलग्न होने और समाज के ि वलत पररसंिािों में योगिान िेने के वलए, एक िैवश्वक उद्यम म ें संयुक्त हो गए हैं, जो काय ष करन े के साझा ढां े स े बंिे, और मानिता को अपने मामलों को आध्यावत्मक वसद्धांतों की नींि पर स्थावपत करने में मिि करने पर केंदित हैं। िशासवनक व्यिस्था के उद्घाटन के सौ िर्ष बाि हमारे द्वारा िर्णषत विकासों के इस चबिं ु पर पहु ं न े के महत्ि को अनिखे ा नहीं दकया जा सकता। वपछले िो िशकों में हुई क्षमता में असािारण िदवद्ध ने - और वजसने बहाई विश्व को अपने ियासों को िभुिमष की समाज-वनमाषण शवक्त की वनमुषवक्त के संिभष में िखे ना संभि बना दिया है - हम अकाट्य िमाण िखे ते ह ैं दक िभुिमष अपने र नात्मक काल के छठे कालखंड में ििेश कर ुका ह।ै वपछले ररजिान में हमने घोर्णा की थी दक िभुिमष से िभावित होकर, बहाई गवतविवियों में बडी संख्या में सहभावगता करने की पररघटना से, और अपने समुिायों की सेिा करने के वलए कौशल और क्षमताओं को िाप्त करन े स े सकं ेत वमलता ह ै दक मास्टर की दिव्य योजना का तीसरा कालखंड िारंभ हो गया है; इस िकार, एक
िर्ीय योजना का तब शुभारंभ और अब समापन वनष्ठािानों की मंडली द्वारा िाप्त ऐवतहावसक विकास के एक समुच्चय को व वन्हत करता ह।ै और एक नए, शवक्तशाली उपक्रम की िहलीज पर, अनयु ावययों का यह संयुक्त वनकाय अपने सामने व्यापक रूप से खुली हुई सभं ािनाओं का लाभ उठाने के वलए तैयार है। अब समाप्त हो रह े कालखंड की एक िमुख विवशष्टता थी अंवतम महाद्वीपीय उपासना गदह का वनमाषण
और राष्ट्रीय एिं स्थानीय स्तर पर उपासना गदहों की स्थापना के वलए पररयोजनाओं का िारंभ। मशररकुलअजकार की अििारणा तथा इसके द्वारा उपासना एिं सेिा को मूतषरूप िने े के संबंि में विश्व भर में बहाईयों ने बहुत कुछ सीखा है। र नात्मक युग के छठे कालखंड के िौरान, उस मागष के बारे में और भी बहुत कुछ सीखा जाएगा जो दक एक समुिाय के िलते-िूलते भवक्तमय जीिन के भीतर विकास से िारंभ हो – और सेिा को िेरणा िते ा हुआ – मशररकुल-अजकार के िकट होने तक जाता ह।ै अनेक राष्ट्रीय आध्यावत्मक सभाओं स े वि ार-विमशष िारंभ हो रह े ह,ैं और जसै े-जैसे आगे बढेंगे, हम समय-समय पर उन स्थानों की घोर्णा करेंगे जहां आगामी िर्ों में बहाई उपासना गदहों का वनमाषण होगा। महानतम नाम के समुिाय को सतत सशक्त होते हुए िखे कर हमारा आनंि, विश्व की पररवस्थवतयों और संघर्ों की वनरंतरता को िखे कर जो िखु और हताश पीडा पैिा करते हैं - विशेर्कर विनाशकारी ताकतों की पुनरािदवि को िखे त े हुए, वजन्होंने जनसमुिाय पर भयािहता का तांडि करते हुए अंतराषष्ट्रीय मामलों को अव्यिवस्थत कर दिया है, हमारे गहन ि:ु ख से मंि पड जाता ह।ै हम भली-भांवत जानते ह ैं और आश्वस्त ह ैं दक, जैसा बहाई समुिायों ने बार-बार अलग-अलग संिभों में ििर्शषत दकया है दक उनकी खुि की पररवस्थवतया ाँ दकतनी भी विकट क्यों न हों, बहाउकलाह के अनुयायी अपने आसपास के लोगों को राहत और समथषन के वलए
िवतबद्ध ह।ैं दकन् तु जब तक पूरी मानिता न्याय और सत्य की नींि पर अपने मामलों को स्थावपत करने का उपक्रम नहीं करती, अिसोस ह ै दक यह एक संकट से िसू रे संकट में डगमगाने के वलए वनयत ह।ै हम िाथषना करत े ह ैं दक, यदि यूरोप में हाल ही में िारंभ युद्ध के िकोप को भविपय के वलए कोई सबक िने ा है, अगर इस े सही और बनी रहने िाली शांवत िाप्त करनी है, तो यह िह राह ुनने के तत्काल अनुस्मारक के रूप में काय ष करेगा जो विश्व को अिश्य ही ुननी ावहए। बहाउकलाह द्वारा अपने समय के सम्राटों और राष्ट्राध्यक्षों को िवतपादित वसद्धांतों, और वजन भारी उिरिावयत्िों को उन्होंने अतीत और ितषमान के शासकों को सौंपा, िे तब की तुलना में, जब िे पहली बार उनकी कलम द्वारा वलखे गए थे, आज शायि और भी अविक िासंवगक और अवनिायष ह।ैं बहाईयों के वलए, ईश्वर की िहद ि योजना का अटल विकास — जो अपने साथ परीक्षाए ंि उथल-पुथल लाता है, लेदकन अन् तत: न् याय, शावन्त और एकता की ओर मानिता को िेररत करता ह ै— िह संिभष ह ै वजसके अंतगषत ईश्वर की लघु योजना, वजसमें मुख्य रूप से अनुयायी व्यस्त हैं, अनािदत होती ह।ै ितषमान समाज की वनवपक्रय वस्थवत िभुिमष की समाज-वनमाषण शवक्त को वनमुषक्त करने की जरूरत को अत्यतं स्पष्ट तथा अत्यािश्यक बना िते ी ह।ै हम अभी के वलए और कुछ नहीं बवकक, पूरे विश्व को पीवडत करते विप्लि तथा उथल पुथल ही िखे पाते ह।ैं आप वनस्संिहे तब सराहना करेंगे, दक ईश्वर की सभी संतानों को ककंकतषव्यविमूढता तथा कडिी मुवश्कलों से मुक्त करने की हमारी ित्येक गंभीर या ना के साथ जुडी हैं, हमारी उतनी ही हृियग्राही िाथषनाए ाँ जो शांवत के युिराज के िमष को आपके द्वारा ििान की जा रही अवत आिश्यक सेिाओं की सिलता के वलए अर्पषत की जाती ह।ैं
ित्येक क्लस्टर में जहां योजना की गवतविवियां गवत पकड रही हैं, हम 30 दिसंबर 2021 के संिशे में हमारे द्वारा िर्णषत उच्च विशेर्ताओं िाले समुिायों का विकास िखे ते ह।ैं जैसे-जसै े समाज विवभन्न िकार के तनािों का अनुभि करता है, आभा सौन्ियष के अनुयायी अपने ल ीलेपन और तार्कषकता, अपने आ रण के स्तर और वनयमपालनता, एकता की खोज में करुणा, अनासवक्त और िैयषता के गुणों के ििशषन के वलए ही अविक से अविक अलग दिखने ावहए। अत्यतं करठनाई के समय में अनुयावययों द्वारा बार-बार, िशाषयी गई विवशष्टताओं और अवभिदवियों ने लोगों को स्पष्टीकरण, सलाह और समथषन के वलए बहाईयों की ओर मुडन े के वलए िेररत दकया है विशर्े कर तब, जब एक समाज का जीिन सकं ट और अित्यावशत व्यििानों से अस्तव्यस्त होता ह।ै इन रटप्पवणयों को साझा करते हुए, हमें इस बात का ध्यान है दक स्ियं बहाई समुिाय भी विश्व में काम कर रही विघटनकारी शवक्तयों के िभािों का अनुभि करता ह।ै इसके अवतररक्त, हम सजग ह ैं दक वमत्र वजतना अविक ईश्वर के शब्िों को बढािा िने े के ियास करेंगे, िे, तत्काल या बाि में, विवभन्न दिशाओं से उतनी ही अविक विरोिी शवक्तयों का सामना करेंगे। उन्ह ेंअपने मन-मवस्तपक और आत्मा को अिश्यंभािी परीक्षाओं के विरुद्ध सशक्त करना ावहए, कहीं ऐसा न हो दक ये उनके ियासों की अखंडता को क्षीण कर ि।ें परंतु अनुयावययों को भली-भांवत पता है दक आगे जो भी तिू ान हैं, िभुिमष की नौका उन सभी के वलए पयाषप्त ह।ै अपनी यात्रा के क्रवमक रणों के िौरान इसने झंझािातों का सामना और लहरों की सिारी की ह।ै अब यह एक नए वक्षवतज की ओर जा रही है। सिषशवक्तमान की संपुवष्टयां, िह िायु है जो इसके पाल को भरती ह ै और इसको गंतव्य की ओर बढाती ह।ै और सवं ििा उसका पथििशषक वसतारा है, जो इस पवित्र यान को इसके वनवित तथा स्पष्ट मागष पर बनाए रखता है। स्िगष के वनिावसयों का आशीिाषि इसके सभी यावत्रयों पर विराजे।
हम एक ऐसे समदु ाय को संबोधत करत ेहुए अ यतं आनंद अनभु व कर रहे ह िजसक
उ च मनोवृ और उ च संक प इसके उ च आ वान के अनुकूल ह। कतना महान, अ यंत ह महान है आपके लए हमारा ेम, और कैसे हमार भावनाएं ऊंची उड़ान भरने लगती ह, जब हम बहाउ लाह क श ाओं पर आधारत जीवन जीने और उनके कटकरण के जीवनदायी जल को एक गंभीर प से यासे व व को दान करने के आपके ईमानदार एवं समपत यास को देखते ह। आपके उ दे य क बल भावना प ट है। सार एवं सगु ठन, सामािजक या, और समाज के संवाद म भागीदार तेजी से आगे बढ़ रह है, और समदु ाय-समहू के तर पर इन उप म क वाभावक ससु ंगतता सतत अधक प ट होती जा रह है। यह उन थान से अधक कहं और प ट नह ं है जहां बढ़ती सं या म लोग यास क एक ंखृ ला म संल न हो रहे ह, िजनम से येक भधमु क समाज-नमाण शि त को नमु त करने का एक साधन है।
इन बारह महन म, जो नौ वषय योजना के आरंभ स े अब तक बीत चकु े ह, हम यह
देखकर स नता हुई है क कस कार इस वैि वक आ याि मक उ यम ने म को ेरत कया है एवं ऊजा से भर दया है, और काय क वश ट परेखाओं को संवेग दया है।
त काल यान क त कया गया है, उन योजनाओं को लाग ू करने पर, जो यह सुनि चत करती ह क येक देश और े म, कम से कम एक समदु ाय-समहू उभरे जहां तीसरा मील का प थर पार कर लया गया हो: ऐसा थान जहां बड़ी सं या म लोग एक साथ काम कर रहे ह और एक जीवंत समदु ाय के जीवन म योगदान दे रहे ह। य यप, इसके त सजग रहते हुए क इस प चीस वष क अवध का ल य व व के हर समुद ाय-समहू म सघन वकास काय म थापत करना है, अनयु ायय ने भधु म के लए नए समदु ाय-समहू को खोलने के साथ-साथ मौजदू ा वकास काय म वाले थान पर अपने यास को तेज करना भी तय कया है। व व के सभी भाग म पायनीयर के लए उभरते अवसर के संबंध म जाग कता बढ़ है - अनेक समपत आ माएं इस बात पर वचार कर रह ह क वे इस अवसर का यु र कैसे दे सकती ह, और अनेक अ य लोग पहले ह पायनीयरगं के थान पर पहुँच गए ह, अ छ सं या म होम ंट पर, साथ ह बढ़ती सं या म अंतररा य तर पर भी। यह उन अनेक तरक म से एक है िजसके वारा, जैसा क हमने आशा क थी, हर जगह के म वारा
पार परक समथन क भावना य त क जा रह है। िजन समुद ाय म शि त का नमाण हो गया है, वे अपने आप को एक अलग थान म - एक अ य समदु ाय-समहू , े , देश, यहां तक क महा वीप म भी - हो रह गत का समथन करने के लए तब ध कर चकु े ह; और
रचना मक साधन दरू से ो साहन देने और अनुभव को य साझा करने म स म पाए गए ह। इस बीच, एक समदु ाय-समहू म अिजत सीख को सँजोने के मूल वध का यापक प से यवहार म लाया जाता है, ताक यह वहाँ के और अ य थान के योजना नमाण को सूचत कर सके। हम यह देखकर कृताथ हुए ह क यह सीखने पर वशेष यान दया जा रहा है क सं थान वारा दान कए जाने वाले शै क अनभु व क गणु व ा म कैसे वृ ध क जाए। जब सं थान या एक समुदाय म जड़ जमा लेती है, तो इसके भाव नाटकय होते ह। गवाह ह, उदाहरण के लए, सघन गतवध के वे क , जहा ँ के नवासी श ण सं थान को अपने एक शि तशाल उपकरण के प म मानने लगे ह: एक ऐसा उपकरण िजसके सश त वकास क िज मेदार उ हने मुखता स े संभाल ल है। यह अ छ तरह जानते हुए क भधमु के वार सदैव पणू तया खलु े रहते ह, अनयु ायी यह सीख रहे ह क जो लोग वेश करने के लए तैयार ह उ ह कैसे ो साहत कया जाए। ऐसी आ माओं के साथ-साथ चलना, और उ ह दहलज पार करने म मदद करना, एक सौभा य और एक वशेष आनंद है, येक सां कृ तक संदभ म पहचानने और अपनाने के इस त वनत ण क गतशीलता के बारे म बहुत कुछ सीखा जाना है। और बस इतना ह नहं है। जबक अनेक समदु ाय-समहू म सामािजक पांतरण म योगदान करने के यास अपने ारि भक चरण म ह, सदैव क भांत सलाहकार वारा कुशलतापवू क समथत रा य आ याि मक सभाएं, इस संबंध म अधक सीखने क स य कोशश कर रह ह क ये यास समदु ाय-नमाण या से कैसे उभरते ह। परवार के समहू और समदु ाय म लोग के सामािजक और भौतक क याण के बारे म चचा को बढ़ावा दया जाता है, साथ ह म अपने नजदक परवेश म अनावतृ हो रहे साथक संवाद म सहभागता के तरके भी खोज रहे ह। जो कुछ भी हमने वणन कया है, उसके म य यवु ाओ ं के काय द त होते ह। भाव
सौ य हो या अ यथा - भाव के केवल नि य अवशोषक होने से परे - उ हने वयं को योजना का नभक और वचारशील नायक स ध कर दया है। जहा ँ समदु ाय ने उ ह इस काश म देखा है और उनक गत के लए परि थतयाँ बनाई ह, वहाँ यवु ाओं न े उनम दखाए गए भरोसे को कहं अधक उचत ठहराया है। वे अपने म को भुधम क श ा दे रहे ह और सवे ा को अधक साथक म ता का आधार बना रहे ह। अ सर, ऐसी सवे ा अपन े से छोट को श त करने का प लते ी है - उ ह न केवल नैतक और आ याि मक श ा दान करते ह, बि क अ सर उनक कूल श ा म भी सहायता करते ह। सं थान या को मजबतू करने के पव उ रदाय व धारण कए, बहाई यवु ा हमार सजँ ोई आशाओ ंको परू ा कर रहे ह। इन सभी यास के लए परि थतयाँ एक गहन प से अि थर अव था म ह। इस बात को यापक प से वीकार कया जा रहा है क समाज क वतमान संरचनाएं मानवता क
सम याओं का नराकरण करने हेत ु तैयार नहं है। बहुत कुछ िजसे यापक प से नि चत और अडग माना जाता था, उस पर न उठाया जा रहा है, और परणामी व ु धता सभी को एक करने वाल ि ट क लालसा पैदा कर रह है। एकता, समानता और याय के समथन म उठाई गई आवाज का सामूहक वर दशाता है क कतन े लोग अपने समाज के लए इन आकां ाओं को साझा करते ह। बेशक, आशीवादत सदय के अनयु ायी के लए यह कोई आ चय क बात नहं है क उनके वारा तपादत आ याि मक आदश के लए दय को लालायत रहना चाहए। तथाप हम इसे मम पश पात े ह क, एक वष म जब मानवता क सामूहक गत क संभावनाएं बरले ह पहले कभी इतनी अधक धधुं ल दखाई द ह, दस हजार से अधक स मेलन म भधु म का काश आ चयजनक दि त के साथ चमका िजसम लगभग पं ह लाख लोग ने भाग लया, और उ हं आदश को बढ़ावा देने के साधन पर यान क त कया। बहाउ लाह क ि ट, और व व क बेहतर हेतु एकता के साथ काम करने के लए मानवजात को उनका आवाहन, वह क था िजसके चार ओर समाज के ववध त व उ सकु ता से एक हुए
- और कोई आ चय नहं, जसै ा 'अ दलु बहा' ने समझाया, "व व का हर समदु ाय इन द य श ाओं म अपनी उ चतम आकां ाओं क अभ यि त पाता है।" मानवता के कुछ शभु चतं क
ारंभ म वु ीकृत और लकवा त व व से परे एक आ य पाने के लए शरण थल के प म बहाई समदु ाय के त आकषत हो सकते ह। तथाप, एक शरण थल से आगे, वे पाते ह क ये आ माऐं कुटु ब क तरह एक साथ मलकर व व के नवीन नमाण के लए म कर रह ह। स मेलन के भौगोलक व तार के बारे म बहुत कुछ लखा जा सकता है, नई योजना को
उ हने जो असाधारण ो साहन दया, अथवा इसम सि मलत होने वाल के दय से स नता और उ साह क जो अभ यि त हुई। लेकन इन कुछ पंि तय म हम यान आकषत करना चाहते ह क उ हने भधु म के वकास के बारे म या मह व दशाएँ ह। व े उस बहाई समदु ाय के तब ब थे जो भेद नह, ं एक दसू रे को कुटु ब के प म देखता है। इस ि टकोण ने स मेलन म, जहाँ सभी का वागत था, नौ वषय योजना का संधान करना वाभावक बना दया। म ने न केवल यि तय और परवार, बि क थानीय नते ाओ ंऔर अधकारय क संगत म अपने समाज के लए योजना के नहताथ पर वचार कया। इतने सारे लोग को एक साथ एक थान पर लाने से व व भर म अनावतृ हो रह आ याि मक और सामािजक गत के बारे म एक पातं रकार वातालाप के लए परि थतयां उ प न हु । एक समुद ाय समूह म सामदु ायक
वकास के एक व तारत होते पैटन के लए इस तरह के खलु े वचार वाले, उ थानकार और
उ दे यपणू स मेलन का वशेष योगदान हो सकता है, वह बहाई सं थाओं के लए भव य म यान म रखने के लए एक मू यवान सबक है। और इस कार न ठावान क मंडल योजना के दसू रे वष म, वे या ा त करना चाहत े
ह, क साथकता के त एक नवीन ि टकोण और गहन अंत ि ट के साथ वेश करती है। समाज-नमाण क शि त नमु त करने के काश म देखे जाने पर काय कतने अलग से दखते ह! यह यापक संभावना एक सतत चलती गतवध को सेवा के एक अकेले काय या मा आंकड़ से कहं अधक देखने क अनमु त देती है। जगह-जगह पर क जा रह पहल से पता चलता है क एक जन-समदु ाय सीख रहा है क अपने वयं के वकास के पथ पर आगे बढ़ने क बढ़ती िज मेदार को कैसे उठाई जाए। परणामी आ याि मक और सामािजक पातं रण लोग के जीवन म अनेक कार से कट होता है। पछल योजनाओं क शंखृ ला म इसे आ याि मक श ा और सामूहक उपासना के वतन के प म सवाधक प ट प से देखा जा सकता था।
योजनाओं क इस नई खंृ ला म, अ य याओं पर बढ़त े प से यान देने क आव यकता है जो एक समुदाय के जीवन को बेहतर करने का यास करती ह - उदाहरण के लए, सावजनक वा य म सधु ार करने, पयावरण क र ा करने, या कलाओ ं क शि त का अधक भावी ढंग
से उपयोग करने के वारा। एक समदु ाय क भलाई के इन सभी पूर क पहलओु ं को आग े बढ़ान े के लए नि चत प से आव यक है, इन सभी े म यवि थत सीख म संल न होने क मता - एक मता जो दैवीय श ाओं और वै ानक जाचं से उ प न मानव ान के संचत भडं ार से उ प न होने वाल अतं ि ट को आकषत करती है। जैसे-जैसे यह मता बढ़ेगी, आने वाले दशक म बहुत कुछ ा त कया जाएगा। इस व तारत, समाज-नमाण ि ट के दरू गामी नहताथ ह। येक समदु ाय इसक ाि त के लए अपने वय ं के पथ पर है। क तु एक े क गत म बहुधा दसू रे े क गत के साथ समान वशेषताएँ होती ह। एक वशषे ता यह है क, जसै े-जैसे मताऐं बढ़ती है
और एक थानीय या रा य समदु ाय क शि तया ं गुणत हगी, तब समय आने पर, हमारे रजवान 2012 संदेश म वणत, एक मशरकुल-अजकार के उ भव के लए आव यक शत अतं तः
परू हो जाएंगी। जैसा क हमने आपको पछले रजवान के अपने संदेश म नद ट कया था, हम समय-समय पर उन थान क पहचान करगे जहां एक बहाई मंदर का नमाण कया जाना है। हम इस समय, कंचनपरु , नपे ाल, और यूनलुंग ा, जाि बया म थानीय उपासना गहृ क थापना का आ वान करत े हुए स नता हो रह है। इसके अतर त, हम कनाडा म टोरंटो म
लंबे समय से थापत रा य हजरतलु -कुदस के समीप े म एक रा य उपासना गहृ बनाने का आ वान करते ह। ये परयोजनाएँ, और भव य म शु क जाने वाल अ य परयोजनाएँ, येक भूम म म वारा मंदर-कोष को दान क गई सहायता से लाभाि वत हगी। चुर ह वे आशीवाद जो एक परम-उदार वामी न े अपन े यजन को दान करने के लए
चुने ह। बलु ंद है आ वान, भ य ह संभावनाएं। अ प है समय िजसम हम सभी का सवे ा करने के
लए आ वान कया गया है। भावो ेिजत ह वे ाथनाएँ, िजनके वारा, आपक ओर से और
आपके अथक यास के लए, बहाउ लाह क दहलज़ पर हम याचना करत
परम य म ,
हम एक ऐसे समदु ाय को संबोधत करत ेहुए अ यतं आनंद अनभु व कर रहे ह िजसक
उ च मनोवृ और उ च संक प इसके उ च आ वान के अनुकूल ह। कतना महान, अ यंत ह महान है आपके लए हमारा ेम, और कैसे हमार भावनाएं ऊंची उड़ान भरने लगती ह, जब हम बहाउ लाह क श ाओं पर आधारत जीवन जीने और उनके कटकरण के जीवनदायी जल को एक गंभीर प से यासे व व को दान करने के आपके ईमानदार एवं समपत यास को देखते ह। आपके उ दे य क बल भावना प ट है। सार एवं सगु ठन, सामािजक या, और समाज के संवाद म भागीदार तेजी से आगे बढ़ रह है, और समदु ाय-समहू के तर पर इन उप म क वाभावक ससु ंगतता सतत अधक प ट होती जा रह है। यह उन थान से अधक कहं और प ट नह ं है जहां बढ़ती सं या म लोग यास क एक ंखृ ला म संल न हो रहे ह, िजनम से येक भधमु क समाज-नमाण शि त को नमु त करने का एक साधन है।
इन बारह महन म, जो नौ वषय योजना के आरंभ स े अब तक बीत चकु े ह, हम यह
देखकर स नता हुई है क कस कार इस वैि वक आ याि मक उ यम ने म को ेरत कया है एवं ऊजा से भर दया है, और काय क वश ट परेखाओं को संवेग दया है।
त काल यान क त कया गया है, उन योजनाओं को लाग ू करने पर, जो यह सुनि चत करती ह क येक देश और े म, कम से कम एक समदु ाय-समहू उभरे जहां तीसरा मील का प थर पार कर लया गया हो: ऐसा थान जहां बड़ी सं या म लोग एक साथ काम कर रहे ह और एक जीवंत समदु ाय के जीवन म योगदान दे रहे ह। य यप, इसके त सजग रहते हुए क इस प चीस वष क अवध का ल य व व के हर समुद ाय-समहू म सघन वकास काय म थापत करना है, अनयु ायय ने भधु म के लए नए समदु ाय-समहू को खोलने के साथ-साथ मौजदू ा वकास काय म वाले थान पर अपने यास को तेज करना भी तय कया है। व व के सभी भाग म पायनीयर के लए उभरते अवसर के संबंध म जाग कता बढ़ है - अनेक समपत आ माएं इस बात पर वचार कर रह ह क वे इस अवसर का यु र कैसे दे सकती ह, और अनेक अ य लोग पहले ह पायनीयरगं के थान पर पहुँच गए ह, अ छ सं या म होम ंट पर, साथ ह बढ़ती सं या म अंतररा य तर पर भी। यह उन अनेक तरक म से एक है िजसके वारा, जैसा क हमने आशा क थी, हर जगह के म वारा
पार परक समथन क भावना य त क जा रह है। िजन समुद ाय म शि त का नमाण हो गया है, वे अपने आप को एक अलग थान म - एक अ य समदु ाय-समहू , े , देश, यहां तक क महा वीप म भी - हो रह गत का समथन करने के लए तब ध कर चकु े ह; और
रचना मक साधन दरू से ो साहन देने और अनुभव को य साझा करने म स म पाए गए ह। इस बीच, एक समदु ाय-समहू म अिजत सीख को सँजोने के मूल वध का यापक प से यवहार म लाया जाता है, ताक यह वहाँ के और अ य थान के योजना नमाण को सूचत कर सके। हम यह देखकर कृताथ हुए ह क यह सीखने पर वशेष यान दया जा रहा है क सं थान वारा दान कए जाने वाले शै क अनभु व क गणु व ा म कैसे वृ ध क जाए। जब सं थान या एक समुदाय म जड़ जमा लेती है, तो इसके भाव नाटकय होते ह। गवाह ह, उदाहरण के लए, सघन गतवध के वे क , जहा ँ के नवासी श ण सं थान को अपने एक शि तशाल उपकरण के प म मानने लगे ह: एक ऐसा उपकरण िजसके सश त वकास क िज मेदार उ हने मुखता स े संभाल ल है। यह अ छ तरह जानते हुए क भधमु के वार सदैव पणू तया खलु े रहते ह, अनयु ायी यह सीख रहे ह क जो लोग वेश करने के लए तैयार ह उ ह कैसे ो साहत कया जाए। ऐसी आ माओं के साथ-साथ चलना, और उ ह दहलज पार करने म मदद करना, एक सौभा य और एक वशेष आनंद है, येक सां कृ तक संदभ म पहचानने और अपनाने के इस त वनत ण क गतशीलता के बारे म बहुत कुछ सीखा जाना है। और बस इतना ह नहं है। जबक अनेक समदु ाय-समहू म सामािजक पांतरण म योगदान करने के यास अपने ारि भक चरण म ह, सदैव क भांत सलाहकार वारा कुशलतापवू क समथत रा य आ याि मक सभाएं, इस संबंध म अधक सीखने क स य कोशश कर रह ह क ये यास समदु ाय-नमाण या से कैसे उभरते ह। परवार के समहू और समदु ाय म लोग के सामािजक और भौतक क याण के बारे म चचा को बढ़ावा दया जाता है, साथ ह म अपने नजदक परवेश म अनावतृ हो रहे साथक संवाद म सहभागता के तरके भी खोज रहे ह। जो कुछ भी हमने वणन कया है, उसके म य यवु ाओ ं के काय द त होते ह। भाव
सौ य हो या अ यथा - भाव के केवल नि य अवशोषक होने से परे - उ हने वयं को योजना का नभक और वचारशील नायक स ध कर दया है। जहा ँ समदु ाय ने उ ह इस काश म देखा है और उनक गत के लए परि थतयाँ बनाई ह, वहाँ यवु ाओं न े उनम दखाए गए भरोसे को कहं अधक उचत ठहराया है। वे अपने म को भुधम क श ा दे रहे ह और सवे ा को अधक साथक म ता का आधार बना रहे ह। अ सर, ऐसी सवे ा अपन े से छोट को श त करने का प लते ी है - उ ह न केवल नैतक और आ याि मक श ा दान करते ह, बि क अ सर उनक कूल श ा म भी सहायता करते ह। सं थान या को मजबतू करने के पव उ रदाय व धारण कए, बहाई यवु ा हमार सजँ ोई आशाओ ंको परू ा कर रहे ह। इन सभी यास के लए परि थतयाँ एक गहन प से अि थर अव था म ह। इस बात को यापक प से वीकार कया जा रहा है क समाज क वतमान संरचनाएं मानवता क
सम याओं का नराकरण करने हेत ु तैयार नहं है। बहुत कुछ िजसे यापक प से नि चत और अडग माना जाता था, उस पर न उठाया जा रहा है, और परणामी व ु धता सभी को एक करने वाल ि ट क लालसा पैदा कर रह है। एकता, समानता और याय के समथन म उठाई गई आवाज का सामूहक वर दशाता है क कतन े लोग अपने समाज के लए इन आकां ाओं को साझा करते ह। बेशक, आशीवादत सदय के अनयु ायी के लए यह कोई आ चय क बात नहं है क उनके वारा तपादत आ याि मक आदश के लए दय को लालायत रहना चाहए। तथाप हम इसे मम पश पात े ह क, एक वष म जब मानवता क सामूहक गत क संभावनाएं बरले ह पहले कभी इतनी अधक धधुं ल दखाई द ह, दस हजार से अधक स मेलन म भधु म का काश आ चयजनक दि त के साथ चमका िजसम लगभग पं ह लाख लोग ने भाग लया, और उ हं आदश को बढ़ावा देने के साधन पर यान क त कया। बहाउ लाह क ि ट, और व व क बेहतर हेतु एकता के साथ काम करने के लए मानवजात को उनका आवाहन, वह क था िजसके चार ओर समाज के ववध त व उ सकु ता से एक हुए
- और कोई आ चय नहं, जसै ा 'अ दलु बहा' ने समझाया, "व व का हर समदु ाय इन द य श ाओं म अपनी उ चतम आकां ाओं क अभ यि त पाता है।" मानवता के कुछ शभु चतं क
ारंभ म वु ीकृत और लकवा त व व से परे एक आ य पाने के लए शरण थल के प म बहाई समदु ाय के त आकषत हो सकते ह। तथाप, एक शरण थल से आगे, वे पाते ह क ये आ माऐं कुटु ब क तरह एक साथ मलकर व व के नवीन नमाण के लए म कर रह ह। स मेलन के भौगोलक व तार के बारे म बहुत कुछ लखा जा सकता है, नई योजना को
उ हने जो असाधारण ो साहन दया, अथवा इसम सि मलत होने वाल के दय से स नता और उ साह क जो अभ यि त हुई। लेकन इन कुछ पंि तय म हम यान आकषत करना चाहते ह क उ हने भधु म के वकास के बारे म या मह व दशाएँ ह। व े उस बहाई समदु ाय के तब ब थे जो भेद नह, ं एक दसू रे को कुटु ब के प म देखता है। इस ि टकोण ने स मेलन म, जहाँ सभी का वागत था, नौ वषय योजना का संधान करना वाभावक बना दया। म ने न केवल यि तय और परवार, बि क थानीय नते ाओ ंऔर अधकारय क संगत म अपने समाज के लए योजना के नहताथ पर वचार कया। इतने सारे लोग को एक साथ एक थान पर लाने से व व भर म अनावतृ हो रह आ याि मक और सामािजक गत के बारे म एक पातं रकार वातालाप के लए परि थतयां उ प न हु । एक समुद ाय समूह म सामदु ायक
वकास के एक व तारत होते पैटन के लए इस तरह के खलु े वचार वाले, उ थानकार और
उ दे यपणू स मेलन का वशेष योगदान हो सकता है, वह बहाई सं थाओं के लए भव य म यान म रखने के लए एक मू यवान सबक है। और इस कार न ठावान क मंडल योजना के दसू रे वष म, वे या ा त करना चाहत े
ह, क साथकता के त एक नवीन ि टकोण और गहन अंत ि ट के साथ वेश करती है। समाज-नमाण क शि त नमु त करने के काश म देखे जाने पर काय कतने अलग से दखते ह! यह यापक संभावना एक सतत चलती गतवध को सेवा के एक अकेले काय या मा आंकड़ से कहं अधक देखने क अनमु त देती है। जगह-जगह पर क जा रह पहल से पता चलता है क एक जन-समदु ाय सीख रहा है क अपने वयं के वकास के पथ पर आगे बढ़ने क बढ़ती िज मेदार को कैसे उठाई जाए। परणामी आ याि मक और सामािजक पातं रण लोग के जीवन म अनेक कार से कट होता है। पछल योजनाओं क शंखृ ला म इसे आ याि मक श ा और सामूहक उपासना के वतन के प म सवाधक प ट प से देखा जा सकता था।
योजनाओं क इस नई खंृ ला म, अ य याओं पर बढ़त े प से यान देने क आव यकता है जो एक समुदाय के जीवन को बेहतर करने का यास करती ह - उदाहरण के लए, सावजनक वा य म सधु ार करने, पयावरण क र ा करने, या कलाओ ं क शि त का अधक भावी ढंग
से उपयोग करने के वारा। एक समदु ाय क भलाई के इन सभी पूर क पहलओु ं को आग े बढ़ान े के लए नि चत प से आव यक है, इन सभी े म यवि थत सीख म संल न होने क मता - एक मता जो दैवीय श ाओं और वै ानक जाचं से उ प न मानव ान के संचत भडं ार से उ प न होने वाल अतं ि ट को आकषत करती है। जैसे-जैसे यह मता बढ़ेगी, आने वाले दशक म बहुत कुछ ा त कया जाएगा। इस व तारत, समाज-नमाण ि ट के दरू गामी नहताथ ह। येक समदु ाय इसक ाि त के लए अपने वय ं के पथ पर है। क तु एक े क गत म बहुधा दसू रे े क गत के साथ समान वशेषताएँ होती ह। एक वशषे ता यह है क, जसै े-जैसे मताऐं बढ़ती है
और एक थानीय या रा य समदु ाय क शि तया ं गुणत हगी, तब समय आने पर, हमारे रजवान 2012 संदेश म वणत, एक मशरकुल-अजकार के उ भव के लए आव यक शत अतं तः
परू हो जाएंगी। जैसा क हमने आपको पछले रजवान के अपने संदेश म नद ट कया था, हम समय-समय पर उन थान क पहचान करगे जहां एक बहाई मंदर का नमाण कया जाना है। हम इस समय, कंचनपरु , नपे ाल, और यूनलुंग ा, जाि बया म थानीय उपासना गहृ क थापना का आ वान करत े हुए स नता हो रह है। इसके अतर त, हम कनाडा म टोरंटो म
लंबे समय से थापत रा य हजरतलु -कुदस के समीप े म एक रा य उपासना गहृ बनाने का आ वान करते ह। ये परयोजनाएँ, और भव य म शु क जाने वाल अ य परयोजनाएँ, येक भूम म म वारा मंदर-कोष को दान क गई सहायता से लाभाि वत हगी। चुर ह वे आशीवाद जो एक परम-उदार वामी न े अपन े यजन को दान करने के लए
चुने ह। बलु ंद है आ वान, भ य ह संभावनाएं। अ प है समय िजसम हम सभी का सवे ा करने के
लए आ वान कया गया है। भावो ेिजत ह वे ाथनाएँ, िजनके वारा, आपक ओर से और
आपके अथक यास के लए, बहाउ लाह क दहलज़ पर हम याचना करत े ह। ह ता रत व व याय मंदर
नौ िर्षों के िजु ेय उद्यम के िो िर्षष तीव्रता से बीत चुके ह।ैं ईश्वर के वमत्रों ने इसके उद्देश्यों को िढ़ृ ता से हृियंगम कर विया ह।ै पूरे बहाई जगत में इस बात की बढ़ी हुई गहरी समझ है दक समुिाय वनमाषण की िदिया को और आगे बढ़ाने तथा गहन सामावजक रूपांतरण को िभावित करने के विए क्या आिश्यक ह।ै िेदकन हर गुजरते दिन के साथ, हम विश्ि की वथथवत को और वनराशाजनक होते, इसके विभाजनों को और गंभीर होते भी िखे रहे ह।ैं समाजों के भीतर और राष्ट्रों के बीच बढ़ते तनाि
िोगों और थथानों को असंख्य तरीकों से िभावित कर रहे ह।ैं
यह ित्येक वििेकशीि आत्मा से ित्युत्तर की मांग करता ह।ै हम सभी इस बात से भी भिीभांवत पररवचत हैं दक महानतम नाम का समुिाय समाज की पीड़ा से अिभावित रहने की आशा नहीं रख सकता। तथावप, यद्यवप यह इन करिनाइयों से िभावित है, यह उनसे भ्रवमत नहीं है; यह मानि जावत के कष्टों से िखु ी है, िेदकन उनसे पंगु नहीं ह।ै हृिय-थपशी चचंता अिश्य ही समुिायों के वनमाषण के वनरंतर ियास को िेररत करे जो वनराशा के थथान पर आशा, संघर्षष के थथान पर एकता
िथतावित करते ह।ैं शोगी एफेंिी ने थपष्ट रूप से िणषन दकया है दक कैसे "मानिीय मामिों में िमबद्ध वगरािट" की िदिया एक अन्य िदिया के समानांतर हो रही है, एकीकरण की िदिया, वजसके माध्यम से "मानि मुवि की नौका", समाज का "अंवतम आश्रय" वनर्मषत दकया जा रहा ह।ै हम यह िखे कर आनंदित हैं दक हर िशे और क्षेत्र में, शांवत के सच्चे अनुगामी इस आश्रय थथि का वनमाषण करने में संिग्न ह।ैं हम इसे ईश्वर के िेम से िज्िवित दकए गए हृिय, नए वमत्रों के विए अपना घर खोिने िािे पररिार, दकसी सामावजक समथया के समाधान के विए बहाउल्िाह की वशक्षाओं से िेरणा िने े िािे सहयोवगयों, आपसी सहयोग की संथकृवत को सशि करते समुिाय, अपनी आध्यावत्मक और भौवतक िगवत के विए आिश्यक कायों को शरूु करना और बनाए रखना सीखते पड़ोस या गााँि, एक नई आध्यावत्मक सभा के उद्भि का आशीिाषि पाते थथानीय समुिाय, के ित्येक वििरण में िखे ते ह।ैं
योजना की विवधयााँ और साधन ित्येक आत्मा को इस दििस में मानिजावत की आिश्यकता में कुछ भाग योगिान करने की अनुमवत िते े ह।ैं ितषमान की परेशावनयों के विए एक अथथायी समाधान ििान करने से परे, योजना का वनष्पािन िह साधन है वजसके द्वारा पीदढ़यों तक अनािृत होने िािी िीघषकाविक, रचनात्मक िदियाओं को हर समाज में गवत ििान की जा रही ह।ै यह सब
एक अवििंब, अपररहायष वनष्कर्षष की ओर इशारा करता है: इस कायष की सफिता के विए अपना समय, अपनी ऊजाष, अपनी एकाग्रता समर्पषत करने िािों की संख्या में वनरंतर, द्रतु-िृवद्ध होनी चावहए। बहाउल्िाह के मानि जावत की एकता के वसद्धांत के अवतररि विश्ि को अपने सभी विविध तत्िों को एकजुट करने के विए पयाषप्त व्यापक िवृ ष्टकोण और कहां वमि सकता है? उस िवृ ष्टकोण को विविधता में एकता पर आधाररत व्यिथथा में पररिर्तषत करने के अवतररि विश्ि उन सामावजक िरारों को और कैसे िीक कर सकता है जो इसे विभावजत करती हैं? इसके अवतररि, कौन िह खमीर हो सकता है वजसके माध्यम से विश्ि के िोग जीिन का एक नया तरीका, बनाए रखे जाने योग्य शांवत का मागष खोज सकते हैं? तब हर दकसी के विए वमत्रता का, समान ियास का, साझा सेिा का, सामूवहक सीख का हाथ बढ़ाएं और एक होकर आगे बढ़ें।
हम इस बात से अिगत हैं दक दकसी भी समाज में युिाओं द्वारा बहाउल्िाह के िवृ ष्टकोण के िवत जागृत होने और योजना के नायक बनने से दकतनी जीिंतता और शवि उत्पन्न होती ह।ै और इसविए, अत्यंत ियािुता, साहस और ईश्वर पर पूणष वनभषरता के साथ बहाई युिाओं को अपने सावथयों तक पहुचं ने और उन्हें इस काम में िाने का संकल्प अिश्य ही िेना चावहए! सभी अिश्य ही उमड़ें, िेदकन युिा अिश्य ही ऊं ची उड़ान भरें।
ितषमान समय की अवििंबता को सेिा से वमिने िािे विशेर्ष आनंि को धुंधिाना नहीं चावहए। सेिा के विए आह्िान एक उत्थानकारी, सिषआचिंगनकारी आह्िान ह।ै यह हर वनष्ठािान आत्मा को आकर्र्षषत करता है, यहां तक दक उन िोगों को भी जो चचंताओं और िावयत्िों से िबे हुए ह।ैं िह वनष्ठािान आत्मा वजन सभी तरीकों में व्यथत है, उनमें उसकी गहरी भवि और िसू रों की भिाई के विए आजीिन चचंता को िखे ा जा सकता ह।ै ऐसे गुण बहुविविध मााँगों िािे जीिन को सुसंगवत ििान करते ह।ैं और दकसी भी िज्िवित हृिय के विए सबसे मधुर पि आध्यावत्मक बहनों और भाइयों के साथ वबताए गए िे क्षण हैं, जो आध्यावत्मक पोर्षण की आिश्यकता िािे समाज की
िखे भाि कर रहे ह।ैं आपको उत्थावपत करने और अपनी राहों में िवशवक्षत करने के विए हम पवित्र समावधयों में, आप्िावित हृिय से बहाउल्िाह को धन्यिाि िते े हैं, और हम उनसे अपने आशीिाषि आप तक भेजने के विए विनती करते ह।ैं
विश्व के बहाइयों को परम विय वमत्रों अब जब नौ िर्षीय योजना के िथम चरण के समापन में मात्र एक िर्षष शर्षे रह गया है, हम इसकी िगवि के बारे में बिाने के विए उत्सुक हैं - दकस िकार पुनीि ियासों के उज्ज्िि उिाहरणों के माध्यम से, िभुधमष द्वारा दिया जा रहा िवृ िकोण अवधकावधक हृियों में आशा का संचार कर रहा ह।ै विकास की िदिया वनरंिर आगे बढ़ रही ह।ै विवभन्न क्षेत्रों में, जहााँ पहिे कभी महत्िपूणष िगवि नहीं िखे ी गई थी, उल्िेखनीय सफििाएाँ िाप्त हुई हैं, जब िभधु मष के बीज ने नि हररि अंकुरण िस्फुरिि दकए हैं और एक साथ अनेक आत्माओं से वमिकर काम करने की क्षमिा उभरने िगी ह।ै ये िगवि िायः समर्पषि पायवनयरों द्वारा संभि हुई है, वजन्होंने अपने स्िामी के िेम से िज्िविि हृियों के साथ, िभािी संख्या में घरेिू मोचे पर और सुिरू िशे ों में वजम्मेिारी संभािने की शीघ्रिा की ह।ै वजन समिु ाय-समूहों में विकास-कायषिम पहिे ही शरूु हो चुका था, िहााँ रचनात्मकिा और ििीणिा के साथ उन जानी-मानी रणनीवियों और कायषपद्धवियों को िागू करने पर नए वसरे से ध्यान दिया गया है, जो वमत्रों को िसू रे और िीसरे मीि के पत्थर को पार करने में सक्षम बनायेंगी। और वसद्ध सामर्थयष िािे समुिाय-समूहों में,
िभुधमष की समाज-वनमाषण शवि की झिकें अवधक दिखाई िने े िगी हैं, जब बहाई जीिन का एक जीिंि और रूपांिरणकारी पैिनष उत्सावहि आत्माओं के बढ़िे समूह द्वारा अपनाया जा रहा ह।ै
इस बीच, समाज के साथ िृणमूि स्िर पर समाज के साथ वमिकर कायष करने के ियासों ने उल्िखे नीय रूप म ें किम आगे बढ़ाए ह।ैं वशक्षा पर केंदिि सामावजक दिया की समुिाय-आधाररि पहिें सबसे िेजी से गुवणि हुई हैं, िेदकन अन्य पहिें - कृवर्ष, स्िास्र्थय, पयाषिरण, मवहिा सशविकरण और किा जैसे क्षेत्रों में भी विकवसि हुई ह।ैं इस िकार की
िगवि सबसे सबि समूहों में सिाषवधक स्पि है, जहााँ कई गााँि या पडोस - यहााँ िक दक एक गिी या उच्च घनत्ि िािी इमारि - में ऐसा जनसमुिाय वनिास करिा है जो िभुधमष के वसद्धांिों को मूिष िास्िविकिा में पररवणि होने िािे उत्थान का अनुभि कर रहा ह।ै इन जगहों पर, जन-नेिा और स्थानीय स्िर पर बच्चों की वशक्षा या सामावजक विकास के विए वजम्मेिार पिावधकारी और व्यवि न केिि िवृ िकोण िावप्त के विए बहाईयों की ओर रुख कर रहे हैं, बवल्क व्यािहाररक समाधानों की खोज में भी सहयोग चाह रहे ह।ैं इसके अिािा, हमें यह
िखे कर िसन्निा हो रही है दक राष्ट्रीय और अंिराषष्ट्रीय स्िर पर, कुछ महत्िपूणष संिािों में बहाई
िवृ िकोण बढ़िा हुआ ध्यान और िशंसा आकर्र्षषि कर रहा ह।ै नौ िर्षीय योजना सीखने की एक व्यापक, िैवश्वक िदिया पर वनभषर करिी है जो बोिीविया के पहाडी इिाकों में उिनी ही िभािी है वजिनी दक वसडनी के उपनगरों म।ें सीखने की इस िदिया ने हर िकार के पररिेश में अपनायी जा सकने िािी रणनीवियों और ियासों को बढ़ािा दिया ह।ै यह व्यिवस्थि है; यह जैविक है; यह सिषआलिंगनकारी ह।ै यह पररिारों के बीच, पडोवसयों के बीच, युिाओं के बीच और उन सभी के बीच संबंध वनमाषण करिी है, जो इस भव्य उपिम के नायक होने के विए िैयार ह।ैं यह संभािनाओं से भरे समुिायों को आगे बढ़ािी ह।ै यह उन िोगों की साझी उच्च आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनािी है जो भूगोि, भार्षा, संस्कृवि या पररवस्थवियों द्वारा अिग-थिग हो गए थे, परंिु अब िे बहाउल्िाह के सािषभौवमक आह्िान, "एक िसू रे के जीिन की बेहिरी के विए वनरंिर ियास करें" को सुन चुके हैं और उसका ित्युत्तर दिया ह।ै और यह पूरी िरह से वनभषर है, ईश्वर के शब्ि की स्फूर्िषिायक शवि पर - िह "एकजुि करने िािी", "आत्माओं को िेररि करने िािी और मानििा के जगि को जोडने और संचाविि करने िािी” शवि - और उन सिि कायों पर वजन्हें यह िेररि करिी ह।ै
िूफानी आकाश के अंधेरे के विरुद्ध, आपके समर्पिष ियासों से दकिना उज्ज्िि िकाश चमक रहा है! संसार में जब आाँवधयााँ चि रही हैं, िब भी िशे ों, क्षेत्रों और समुिाय-समूहों में आश्रयों का वनमाषण दकया जा रहा है जो मानििा को शरण िगें े। िेदकन अभी भी बहुि कुछ दकया जाना बाकी ह।ै ित्येक राष्ट्रीय समुिाय की योजना के इस आरंवभक चरण के िौरान की जाने िािी िगवि के विए अपनी-अपनी अपेक्षाएाँ ह।ैं समय बीि रहा ह।ै विय वमत्रों, और दिव्य वशक्षाओं के िणेिाओं, और आशीिाषदिि सौंियष के अनुयावययों – अभी आपके ियासों की आिश्यकिा ह।ै अगिे ररजिान से पहिे िीव्रिा से समाप्त होिे महीनों में की गई ित्येक िगवि महान नाम के समुिाय को योजना के िसू रे चरण में जो कुछ भी पूरा करना है, उसके विए बेहिर ढंग से िैयार करेगी। ईश्वर आपको सफििा ििान करे। इसके विए हम संिभु स्िामी से िाथषना करिे हैं; इसके विए हम उसकी अचूक सहायिा की याचना करिे हैं; इसके विए हम उससे विनिी करिे हैं दक िह आप में से ित्येक की सहायिा के विए अपने चुने हुए स्िगषििू ों को भेजे।