Selections from the Writings of the Báb

Hindi · बाब

Kitab-i-Asma' (Book of Names) BB00003

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हे नाथ! धरती के सभी लोगां को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने में सहायता कर, ताकि अस्तित्व में लाया गया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की सीमाओं से बाहर न रह पाये। अनन्तकाल से, तू वह करने में समर्थ रहा है जो तुझे प्रिय है और जो तेरी इच्छा है।

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महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे परमात्मन्! तेरे उस नाम के सहारे, जिसके द्वारा काल ठहर गया था, पुनर्जीवन सम्भव हो पाया था, और स्वर्ग तथा धरती के सभी वासी प्रकम्पित हो उठे थे, मैं याचना करता हूँ कि उन सब पर, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं और तेरे धर्म के कार्यों में लिप्त हैं, अपनी कृपा के स्वर्ग और अपनी स्नेहिल करूणा के बादलों से वह बरसा जो उन सेवकों के हृदयों को उल्लसित कर दे। हे नाथ! अपने सेवक और सेविकाओं को तुच्छ आसक्ति और व्यर्थ कल्पनाओं की पीड़ा से बचा और अपने ज्ञान की निर्मल जलधार से एक घूंट पीने की अनुकम्पा प्रदान कर। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिमान, परम उदात्त, सदा क्षमाशील, और परम उदार है।

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हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी कृपा के माध्यम से उन सब से हमारी रक्षा कर जो तेरे लिये घृणित है और हमें कृपापूर्वक वह प्रदान कर जो तेरे लिये शोभनीय है। हमें अपनी उदारता का और अधिक भाग दे और हमें आशीर्वाद प्रदान कर। हमने जो कुछ किया है उसके लिये हमें क्षमा कर और हमारे पापां को धो डाल तथा अपनी कृपापूर्ण क्षमाशीलता के द्वारा हमें क्षमा कर। वस्तुतः तू सर्वादात्त, स्वयंजीवी है।

तेरा प्रेममय विधान स्वर्ग में और धरती पर सभी सृजित वस्तुओं को घेरे हुए है और तेरी क्षमा समस्त सृष्टि को पार कर गई है। प्रभुसत्ता तेरी है; तेरे ही हाथ में सृजन एवं प्रकटीकरण के साम्राज्य हैं; अपने हाथ में तू समस्त सृजित वस्तुओं को धारण किये हुए है तथा तेरी ही मुठ्ठी में क्षमाशीलता के नियत परिमाण हैं। अपने सेवकां में से तू जिसे चाहे उसे क्षमा कर देता है। वस्तुतः तू सदा क्षमाशील, सर्वप्रेममय है। तेरे ज्ञान से कुछ भी बाहर नहीं रह सकता और ऐसा कुछ भी नहीं है जो तुझ से छिपा है।

हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी शक्ति के सामर्थ्य से हमारी रक्षा कर, हमें अपने उमड़ते हुए अद्भुत महासागर में प्रवेश करा और हमें वह प्रदान कर जो तेरे लिये अति शोभनीय हो।

तू परम शासक, बलशाली, कर्ता, उदात्त, सर्वप्रेममय है!

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मैं तुझसे क्षमा की भीख माँगता हूँ, हे मेरे परमेश्वर, तेरे उल्लेख के अतिरिक्त प्रत्येक उल्लेख के लिये और तेरी प्रशंसा के अतिरिक्त प्रत्येक प्रशंसा के लिये और तेरी निकटता के आनन्द के अतिरिक्त प्रत्येक आनन्द के लिये और तुझसे संलाप के सुख के अतिरिक्त प्रत्येक सुख के लिये और तेरे प्रेम एवं तेरी सुप्रसन्नता के आनन्द के अतिरिक्त प्रत्येक आनन्द के लिये और उन सभी वस्तुओं के लिये जो मुझसे सम्बद्ध हैं, जिनका तुझसे कोई सम्बन्ध नहीं है, हे तू जो स्वामियां का स्वामी है, वह जो साधन प्रदान करता है और द्वारों को खोलता है।

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क्या ईश्वर के अतिरिक्त कठिनाइयां को दूर करने वाला अन्य कोई है? कह दो, ईश्वर का गुणगान हो! वही ईश्वर है! सभी उसके सेवक हैं तथा सभी उसके आदेश से प्रतिबन्धित हैं।

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हे स्वामी! तू प्रत्येक वेदना का हर्ता है और प्रत्येक व्याधि को दूर करने वाला है। तू वह है जो प्रत्येक शोक को दूर करता है, प्रत्येक दास को मुक्त करता है और प्रत्येक आत्मा का उद्धारकर्ता है। हे स्वामी! अपनी दया के द्वारा मुझे मुक्ति प्रदान कर और अपने ऐसे सेवकां में गिन जिन्हांने मोक्ष पा लिया है।